नयी दिल्ली, (वार्ता) वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एजेंसी केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) माल एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण में इकाइयों की सुविधा के लिए अधिकारियों को आवेदन की प्रोसेसिंग करते समय अनुमान के आधार पर, छोटी-मोटी विसंगतियों के कारण या ऐसे अतिरिक्त दस्तावेजों के अभाव के लिए नोटिस जारी न करने के निर्देश दिए गए हैं जो जांच-पड़ताल की दृष्टि से गैर जरूरी हैं।
मंत्रालय की शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि अधिकारियों को उन मामलों में संबंधित उप/सहायक आयुक्त की मंजूरी लेने का भी निर्देश दिया गया है, जहां सूचीबद्ध दस्तावेजों के अलावा अन्य दस्तावेज मांगे जाने की आवश्यकता है।
संशोधित निर्देशों में इसी तरह क्षेत्रीय प्रधान मुख्य आयुक्त/मुख्य आयुक्तों को बारीक नजर रखने और जहां भी आवश्यक हो, उपयुक्त व्यापार नोटिस जारी करने के लिए तंत्र विकसित करने सलाह दी गई है। इन निर्देशों के प्रतिकूल जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की किए जाने की भी सलाह दी गई है ।
मंत्रालय का कहना है कि इससे जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया में और सुविधा होगी, अनुपालन का बोझ कम होगा और व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा मिलेगा। सीबीआईसी के लिए संशोधित दिशा-निर्देश करदाताओं पर अनुपालन का बोझ कम करेंगे और नियम-आधारित पारदर्शिता को सुगम बनाएंगे।
वित्त मंत्रालय को जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान आवेदकों को होने वाली कठिनाइयों के संबंध में कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जो मुख्य रूप से अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग के आधार पर अधिकारियों द्वारा उठाए गए प्रश्नों से संबंधित हैं। उसके मद्देनजर 17 अप्रैल, 2025 को जीएसटी पंजीकरण आवेदनों को संसोधित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश (निर्देश संख्या 03/2025-जीएसटी) जारी किए हैं ।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि अधिकारियों को पंजीकरण आवेदन प्रपत्र में दिए गए दस्तावेजों की निर्धारित सूची का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। विशिष्ट मामलों में पंजीकरण आवेदन प्रपत्र के साथ अपलोड किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों को भी निर्देशों में निरुपित किया गया है।
