संजय टाइगर रिजर्व में मौसी की ममतामयी छाया में शावकों ने सीखी शिकार की कला

सीधी: संजय टाइगर रिजर्व की वस्तुआ रेंज में बाघिन टी 28 शावकों संग भ्रमण करते हुए उन्हें आत्मरक्षा और शिकार की कला सिखा रही है।वाइल्ड लाइफ के जानकार डॉ कैलाश तिवारी बताते हैं कि टी 28 बाघिन संजय टाइगर रिजर्व में अपनी ममता और देखभाल के लिए पहले भी सुर्खियों में रही है। यह बाघिन न केवल अपने बच्चों, बल्कि अपनी बहन टी 18 के अनाथ शावकों की भी देखभाल करती रही है।

जिनकी मां की एक ट्रेन दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। टी 28 ने इन शावकों को गोद लेकर उन्हें अपनी संतान की तरह पाला, जिसके कारण इसे “मौसी” के नाम से भी जाना जाता है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, टी 28 की यह खासियत प्राकृतिक संतुलन और बाघों के सामाजिक व्यवहार को दर्शाती है। बाघिन टी 28 अपने शावकों को जंगल की बारीकियां सिखाती है। वह उन्हें शिकार की तकनीक, छिपने की कला और खतरे से बचने के तरीके सिखाती है।

इधर, संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र के भ्रमण पर गए पर्यटकों ने उसे कैमरे में कैद कर लिया। वहीं रेंजर कविता वर्मा ने बताया कि टी 28 का यह व्यवहार बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास की मजबूती को दर्शाता है। संजय टाइगर रिजर्व जो सफेद बाघ मोहन की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है, बाघों की बढ़ती संख्या के लिए जाना जाता है।संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में लगातार बाघों का कुनवा बढ़ता जा रहा है।जिससे संजय टाइगर रिजर्व की पहचान भी दिनों दिन बढ़ रही है। अब टाइगर रिजर्व अपना पूर्ण स्वरूप ले चुका है।

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