नौ दिवसीय गुण्डीचा यात्रा के बाद आज तीनों विग्रहों की हुई वापसी; रथों को भव्यता के साथ खींचा गया, जगन्नाथ धाम में भक्तिमय माहौल।
पुरी, 5 जुलाई (नवभारत): ओडिशा के पुरी में आज बहुदा यात्रा की धूम है, जो भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की नौ दिवसीय गुण्डीचा यात्रा के बाद अपने श्रीमंदिर (जगन्नाथ धाम) में घर वापसी का प्रतीक है। इस पवित्र यात्रा को देखने और रथों को खींचने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुरी की सड़कों पर उमड़ पड़े हैं, जिससे पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया है।
बहुदा यात्रा, जिसे ‘उल्टा रथ यात्रा’ भी कहा जाता है, रथ यात्रा के समान ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने भव्य रथों – नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन – पर सवार होकर गुण्डीचा मंदिर से वापस जगन्नाथ मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा भक्तों के लिए एक विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह उन्हें देवताओं के करीब आने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर देती है। सड़कों पर ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारे गूंज रहे हैं और भक्त अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए बेताब दिख रहे हैं।
जगन्नाथ मंदिर में वापसी से पहले होगी रथों पर विशेष ‘नीलाद्री बिजे’ रस्म
भगवान के रथों की वापसी यात्रा के दौरान भी कई पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इन रथों को भव्यता के साथ खींचा जाता है, और रास्ते भर भक्त भजन-कीर्तन करते हुए चलते हैं।
जगन्नाथ मंदिर में पहुंचने के बाद, देवताओं को रथों से उतारकर मंदिर के अंदर स्थापित करने से पहले, कई और रस्में निभाई जाती हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण रस्म ‘नीलाद्री बिजे’ है, जो बहुदा यात्रा के अगले दिन संपन्न होती है। यह रस्म देवताओं के लिए विशेष भोग और अनुष्ठानों के साथ मनाई जाती है। बहुदा यात्रा न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह ओडिशा की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है, जो हर साल देश-विदेश से लाखों पर्यटकों और भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

