सीहोर। बदहाल स्कूल की मरम्मत व रंग- रोगन सहित अन्य कार्यों के लिए स्कूल को मिले दस लाख रुपए खर्च तो किए गए, लेकिन स्कूल की दशा नहीं सुधरी, स्कूल का भवन अभी भी पहले की तरह खस्ताहाल नजर आ रहा है. ग्रामीणों ने इसमें फर्जीवाड़े का आरोप लगाया. डीईओ ने सवा माह पूर्व जांच कमेटी तो बना दी, लेकिन जांच के बाद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है.
पीएमश्री हाई स्कूल चैनपुरा के प्राचार्य पर करीब 10 लाख रुपए के घोटाले के आरोप लगे हैं. यहां स्कूल में मरम्मत सहित अन्य कई कार्यों की राशि का भुगतान किया गया है, लेकिन स्कूल की हालत जस की तस बनी हुई है. पता चला की प्राचार्य ने खुद अपने निजी खाते और अपने अन्य रिश्तेदारों के खातों में यह राशि ट्रांसफर करवा दी, लेकिन हकीकत में कार्य नहीं करवाए. जब मामले ने तूल पकड़ा तो डीईओ ने आलोक शर्मा से प्रभार लेकर महेंद्र कुमार माहेश्वरी को प्राचार्य का प्रभार दिया है, साथ ही आलोक शर्मा को यहां से हटाकर अन्य स्कूल में अटैच किया है. इसके साथ ही जांच के लिए दो प्राचार्यों की एक कमेटी भी बनाई है.
गांव चैनपुरा स्थित शासकीय पीएमश्री हाई स्कूल के प्राचार्य आलोक शर्मा पर निर्माण कार्यों के लिए प्राप्त करीब 10 लाख रुपए की राशि का गबन करने का आरोप है. इसका खुलासा तब हुआ जब ग्रामीणों ने स्कूल की जर्जर हालत को देखकर सवाल उठाने शुरू किए. जब ग्रामीणों ने गहराई से जानकारी जुटाई तो पाया कि शासन द्वारा स्कूल की मरम्मत, रंगाई-पुताई, दरवाजे-खिड़कियों की मरम्मत, और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए लगभग दस लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने पैसे मिलने के बाद भी स्कूल की हालत पहले से भी बदतर बनी हुई है. खिड़कियां टूटी हुई हैं, दरवाजे जर्जर हैं और दीवारों से प्लास्टर उखड़ चुका है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जो राशि स्कूल की मरम्मत के लिए आई थी, वो आखिर गई कहां?
पीएम से की शिकायत
उल्लेखनीय है कि गांव चैनपुरा के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर पीएमश्री स्कूल प्राचार्य द्वारा 10 लाख रुपए के गबन की सूचना दी थी. ग्रामीणों ने पत्र में लिखा था कि शिक्षकों की बातों से हमें पता चला है कि प्राचार्य आलोक शर्मा ने शाला से प्राप्त 10 लाख रुपए का गबन किया है. उन्होंने करीब 4 लाख रुपए तो अपने निजी खाते में डाले हैं. जिसकी हमने चर्चा की तो उन्होंने डांट-डपट कर भगा दिया, लेकिन इस बात से घबराए संयुक्त खाता धारक शिक्षक ने इसकी पूरी सूचना जिला शिक्षा अधिकारी को दी. उन्होंने भी कोई कार्रवाई नहीं की. फिर कलेक्टर को शिकायत की, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं की गई.
एक माह 10 दिन बाद भी अधिकारी मौन
मामले की जांच के लिए डीईओ ने 7 मार्च को कमेटी बनाकर तत्काल जांच कर रिपोर्ट बंद लिफाफे में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. आश्चर्य की बात यह है कि पूरे एक महीने 10 दिन बाद भी इस मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई. एक महीने से ज्यादा समय में तो कमेटी ने जांच रिपोर्ट तैयार कर 16 मार्च को रिपोर्ट डीईओ कार्यालय में जमा की है, लेकिन दूसरे दिन भी डीईओ ने रिपोर्ट नहीं खोली. बताया जाता है कि मामले में जांच कमेटी को पूर्व प्राचार्य आलोक शर्मा ने कैशबुक ही नहीं दी। जिस कारण जांच रिपोर्ट तैयार करने में देरी हुई है.
जांच के आधार पर की जाएगी कार्रवाई
ग्रामीणों ने शिकायत की थी, इसके लिए जांच कमेटी बनाई है. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. अभी पीएमश्री स्कूल चैनपुरा में प्राचार्य का प्रभार अन्य शिक्षक को देते हुए पूर्व प्राचार्य आलोक शर्मा को अन्य संस्था में भेजा है ताकि जांच प्रभावित न हो.
संजय सिंह तोमर,
जिला शिक्षा अधिकारी
