मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
अंचल से अपने बलबूते दिल्ली दरबार तक पहुंच रखने वालों में शामिल मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को तेलंगाना का प्रभार, सत्यनारायण पटेल कांग्रेस वर्किंग कमेटी में राष्ट्रीय सचिव, झाबुआ से कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया को आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे दायित्व दिए जा चुके हैं, लेकिन पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष व ओबीसी नेता अरुण यादव विगत कई समय से हाशिए पर हैं. बात चाहे प्रदेश की हो या केंद्र की उन्हें छुटपुट चुनावी प्रदेशों में प्रभार के अलावा कोई उल्लेखनीय तवज्जो नहीं मिली.
सहकारी नेता सुभाष यादव की विरासत सम्हाल रहे अरुण की मालवा -निमाड़ में कभी अच्छी पकड़ रही है, बगैर दमदार पद के केवल कार्यकर्ता रह गए अरुण यादव नए चेहरों के बीच क्षणै-क्षणै वह भी खोते जा रहे हैं. राहुल गांधी के प्रदेश में भी बिहार पेटर्न लागू किए जाने की चर्चा से एक बार फिर अरुण यादव को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की सुगबुगाहट शुरू हो चली है. कई राज्यों में चुनावी असफलता के बाद बदलाव की ओर बढ़ रही कांग्रेस ने बिहार संगठन में दो तिहाई ईबीसी, ओबीसी और एससी-एसटी के लोग लिए हैं. यहां भी इन वर्गों में पुन: पैठ बनाने यही पेटर्न की तैयारी है. इसी के तहत अरुण यादव को राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी चेहरा बनाने की चर्चा चल रही है. देखते हैं अरुण यादव की किस्मत में यह चर्चा ही रहती है या अमलीजामा पहनती है.
छवि किसकी बिगड़ी?
सार्वजनिक जीवन में कार्यरत नेताओं के पारिवारिक सदस्यों का अमर्यादित आचरण छवि बिगाडऩे में देर नहीं करता. कुछ वर्षो में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जिसमें अहंकारवश शक्तियों का दुरुपयोग किया गया. ताजा मामला इंदौर विधायक पुत्र रुद्राक्ष शुक्ला का चर्चा में है. पट बंद होने के बाद देर रात देवास माता टेकरी पर उन्होंने साथियों के साथ मां चामुंडा दर्शन के लिए पुजारी के बेटे से मारपीट की. मामला दबा दिया गया था, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों पर ही कार्रवाई हुई. यहां प्रश्न यह नहीं है कि मारपीट, दुर्व्यवहार, जोर जबरदस्ती किसने की, बात रुतबा दिखाने के लिए किए गए दुराचरण की है. उन्हें अपने पिता की गरिमा का ध्यान रखना था. इसमें पुजारी का कुछ नहीं बिगड़ा, छवि पिता की ही प्रभावित हो रही है.
नेता लूट ले गए मंच
विगत दिनों केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी धार जिले में नेशनल हाई-वे परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करने आए थे. कार्यक्रम के दौरान देखा गया कि मंच बरगदी नेता लूट ले गए. धार की सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर दर्शक मात्र बनकर रह गईं, जबकि क्षेत्रिय सांसद व केंद्रीय मंत्री होने के नाते इस मौके पर बराबर महत्व मिलना चाहिए था, लेकिन बोनी साबित हुईं. ऐसा ही कुछ इंदौर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती समारोह का रहा. दीप प्रज्ज्वलन के लिए अतिथियों की कतार में लगे मंत्री तुलसी सिलावट दीप तक पहुंच भी नहीं पाए कि अगला कार्यक्रम शुरू कर दिया. वह तो मुख्यमंत्री मोहन यादव का ध्यान इस ओर गया तो शपथ कार्यक्रम में विशेष तौर पर उनके उल्लेखनीय कार्यो की सराहना करते हुए सिलावट को उन्होंने आगे बुलाया
