रीवा: ऐतिहासिक वेंकट भवन के भीतर से जो सुरंग बनी है और उसी सुरंग का एक हिस्सा रीवा के ऐतिहासिक अमर कोठी के समीप तक जाती है. उस ऐतिहासिक अमरा कोठी को व्यावसायिक मानसिकता से ग्रसित लोगों के द्वारा धराशाई कर के वहां पर व्यावसायिक परिसर बनाए जाने की योजना पर काम भी चल रहा है जो सर्वथा अनुचित एवं विन्ध्य वैभव के विरासत रूपी धरोहर के साथ खिलवाड़ किए जाने के बराबर है. विन्ध्यांचल के ऐतिहासिक स्थलों को नष्ट करके रीवा के प्राचीन वैभव को विनिष्ट करने का जो कार्य चल रहा है वह सर्वथा अनुचित है. यह कार्य विन्ध्य वैभव को विलुप्त करने के समान है इसे रोका जाना चाहिए.
रीवा के विंध्य के पुरातात्विक अवशेष विशेष तौर पर तरायी अंचल के ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति अपनी लेखनी के माध्यम से विरासत को बचाने के लिए प्रयत्नशील जिल पुरातत्व संघ के सदस्य एवं साहित्यकार राम लखन गुप्त (पत्रकार) ने आरोप लगाया है कि विभिन्न विरासत को विलुप्त करके महज व्यावसायिक मानसिकता को बढ़ावा देना इस अंचल की संस्कृति के साथ खुला खिलवाड़ है.
उन्होंने बताया है कि रीवा के वैंकट भवन के समीप बने ऐतिहासिक अमरा कोठी पर व्यावसायिक मानसिकता के लोगों की दृष्टि होने के कारण उसको ध्वस्त किए जाने का कार्य प्रारंभ किया गया है जो इतिहास के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने कहा है कि रीवा के अमरा कोठी को गिराया जाना अति निन्दनीय कार्य है. रीवा जिले के समीप तीर्थराज प्रयाग में जहां महाकुंभ के दौरान देश विदेश के 60 करोड़ से भी अधिक लोगों द्वारा प्रयागराज पहुंचकर स्नान करने की बात कही जाती है, वही प्रयागराज से लगे रीवा जिले के किसी भी ऐतिहासिक एवं गरिमामय स्थान को पर्यटन के दृष्टि से विकसित न किया जाना चिन्ता का विषय है.
क्यों बनी अमरा कोठी
इस अमर कोठी के बारे में बताया जाता है कि पूरा कोठी कंपाउंड रीवा नरेशों का था. सन 1886 ईस्वी में महाराजा रघुराज सिंह को चंदेलिन महारानी शिवदान कुंवरि व उनके पुत्र युवराज वेंकट रमण सिंह के लिए सर्व सुविधा युक्त भवन बनवाया गया था. यह भवन ठीक कमिश्नर ऑफिस के सामने बना हुआ है. 1886ई. 2261.8 वर्ग फीट में बना है. उसके निर्माण में 1295 96/ रुपये खर्च हुए थे. इस कोठी का सबसे खूबसूरत हिस्सा रनिवास का है. इस कोठी के प्रथम तल में 26 & 40 का एक बड़ा भव्य हाल है. इसमें बनी झरोखा मुगल वा राजपूताना शैली की खूबसूरत महीन तरसी हुई जालियां हैं. इस हाल के भीतर ऊपरी हिस्से में खूबसूरत पेंटिंग की हुई है जो इस हाल की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है यह अमराकोठी 139 वर्ष पुरानी है जो पुरातत्व की महत्वपूर्ण भवनो में आती है और यह राज्य पुरातत्व की धरोहर है
