भोपाल। नर्मदापुरम रोड पर लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित साइकिल ट्रैक अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। शहर के नागरिकों को सुरक्षित और सुगम साइकिलिंग का अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से बने ट्रैक पर अब अतिक्रमण है। आलम यह है कि इस ट्रैक पर साइकिल सवारों की जगह ठेले वाले अपना सामान बेच रहे हैं और पान की गुमठियां सजी हुई हैं, जिससे यह अपना उद्देश्य ही खोता जा रहा है।यह स्थिति शहर के विकास की योजनाओं पर सवाल उठाती है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि एक सार्वजनिक सुविधा आम जनता के लिए अनुपलब्ध रहे, तो इसका क्या औचित्य है? इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिलता। अब अतिक्रमणकारियों की दबंगई के चलते यह नेक पहल दम तोड़ती नजर आ रही है।
चिंताजनक बात यह है कि इन अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। नगर निगम और यातायात पुलिस की ओर से कभी-कभार खानापूर्ति के लिए चालानी कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। अतिक्रमणकारी कुछ दिनों के लिए जरूर पीछे हटते हैं, लेकिन स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। यह सिर्फ साइकिल ट्रैक पर अतिक्रमण का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी सार्वजनिक संपत्तियों के रखरखाव और उनके दुरुपयोग को रोकने में हमारी विफलता का भी प्रतीक है।
