लावण्या माथुर की पुस्तक ‘बिनीथ द सरफेस’, साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण दस्तक

भोपाल। लेखन ऐसी विधा है जो पाठक की सोच बदल देती है और सकारात्मक दृष्टिकोण से लेखक समाज को आगे ले जाने का सहयोग देते हैं. ऐसा ही अनुभव है लेखिका लावण्या माथुर का, जिन्होंने अपनी पहली पुस्तक ‘बिनीथ द सरफेस’ के साथ साहित्य जगत में एक महत्वपूर्ण दस्तक दी है. लावण्या को वैश्विक स्तर पर मिली पहचान और आकर्षण ने उन्हें अपने पेन नाम आइरिस के साथ आने के लिए प्रेरित किया। आइरिस दुनिया का एकमात्र ऐसा फूल है जिसकी खुशबू उसकी जड़ों में निहित है, और यह इस तथ्य का प्रतीक है कि हमारी अच्छाई हमारे भीतर ही मौजूद है। इसलिए, उनका लेखन मानवीय भावनाओं के उस हिस्से को जगाने का प्रयास करता है. एक अनुभवी लर्निंग और टैलेंट डेवलपमेंट प्रोफेशनल और प्रशिक्षक के रूप में, लावण्या ने भारत और विदेशों में वर्षों तक काम किया है, जिससे उन्हें जीवन को एक अद्वितीय दृष्टिकोण से देखने का अवसर मिला. लगभग 15 वर्षों के उनके इस वैश्विक अनुभव ने उनकी सोच और लेखन को गहराई से प्रभावित किया है.

बचपन से लेखन में रूचि

भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट के पूर्व विमानपत्तन निदेशक आकाश दीप की पुत्री लावण्या माथुर बचपन से ही लेखन में रूचि लेती रही. उनके लिए शांति और विचारों को व्यक्त करने का लेखन एक माध्यम रहा. समय के साथ, उनकी अवलोकन क्षमता विकसित हुई और उनकी लेखनी और भी परिपक्व होती चली गई. कहानियों, साहित्य, गायन, कला और रचनात्मकता के प्रति उनका गहरा जुनून है. कला की मन को सुंदर तरीके से खोलने की क्षमता उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करती है. एक पहली बार की लेखिका के रूप में, उनकी यात्रा अभी शुरू हुई है और उनका दृढ़ संकल्प है कि वे अपने लेखन के माध्यम से दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाएं, क्योंकि उनका मानना है कि उनके पास वह कला है जिसमें दुनिया को बदलने की शक्ति है. लावण्या ने बताया कि ‘बिनीथ द सरफेस’ उन पाठकों के लिए एक अनुपम कृति है जो आत्म-चिंतन के कुछ पल तलाश रहे हैं. एक ही बार में पूरी किताब पढ़ने में कठिनाई महसूस करते हैं तो, चाय या कॉफी के साथ कुछ ऐसा पढ़ना चाहते हैं जो उनके जीवन में मूल्य जोड़े, न कि केवल समय बर्बाद करे. उनके लिए यह पुस्तक है. उन्होंने कहा कि ‘बिनीथ द सरफेस’ न केवल पढ़ने का अनुभव है, बल्कि यह एक आंतरिक यात्रा है जो पाठकों को गहराई से सोचने और अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करती है. लावण्या माथुर की यह पहली कृति निश्चित रूप से उन लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाएगी जो सार्थक और प्रेरणादायक साहित्य की तलाश में हैं. यह पुस्तक अमेज़न पर विश्व स्तर पर उपलब्ध है और जल्द ही अमेज़न किंडल पर भी उपलब्ध होगी. हिंदी पाठकों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे इस गहराई भरी रचना से जुड़ें और लावण्या माथुर की अनूठी साहित्यिक यात्रा का हिस्सा बनें.

 

 

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