सीहोर. यहाँ अस्पताल की सरकारी दवाओं का उपयोग डॉक्टरों के क्लिीनिक पर होता पाया गया है. ऐसा एक वायरल वीडियो इन दिनों चर्चाओं में बना है.
जिला अस्पताल के आईसीयू में उपयोग होने वाली महंगी दवाइयों को यहां के डॉक्टर अपने निजी क्लीनिक पर भेजते हैं और वहां मरीजों को उपचार में उपयोग की जाती है. यह खुलासा उस समय हुआ जब जिला अस्पताल के आउटसोर्स कर्मचारी को कुछ जागरुक युवाओं ने पकड़कर उसका वीडियो बनाया. जिसमें कर्मचारी अपनी जेब से महंगी दवाइयां (ड्रिप लगने वाली बॉटल) जेब में रखकर ले जाता दिखा है. जब इस आउटसोर्स कर्मचारी से पूछा गया कि यह दवा किसके कहने पर कहां ले जा रहे हो तो उसने जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र जराठे का नाम बताया. उसने यह बात स्वीकार की कि डॉक्टर जराठे फोन करके बोल देते हैं तो आईसीयू के कर्मचारी उसे दवा दे देते हैं. यही दवा वह डॉ. जराठे के क्लीनिक पर जाकर देता है. सोशल मीडिया पर इस मामले का पूरा वीडियो जमकर वायरल भी हुआ है. इस वीडियो के वायरल होने के बाद जिला अस्पताल में हड़कंप मच गया.अस्पताल प्रबंधन इस मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने डॉ. जराठे को सिर्फ नोटिस देने की बात कही है. खास बात यह है आईसीयू में जहां से ये आउटसोर्स कर्मचारी दवाएं जेब में भरकर बाहर निकलता है वहां के सीसीटीवी कैमरे भी बंद पड़े हैं। कैमरे बंद होने से इस मामले में पूरे प्रबंधन की लिप्तता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. इस संबंध में डॉ. जराठे ने फोन पर कुछ भी कहने से मना कर दिया.
चर्चाओं में रहा था किराए के डॉक्टरों का मामला
इससे पहले यहां किराए के डॉक्टर द्वारा इलाज करने का मामला गर्माया था. यहां ड्यूटी डॉक्टर्स जब निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाते थे तो उनके स्थान पर दो अन्य चिकित्सक यहां ड्यूटी करते थे. खुद कलेक्टर के निर्देश के बाद भी मामले में इन डॉक्टर्स या जो डॉक्टर इन्हें यहां बैठाकर जाते थे उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी. तात्कालीन कलेक्टर के निर्देश के पालन में सिविल सर्जन ने कोतवाली में आवेदन जरूर दिया था, लेकिन उसके बाद कहानी आगे नहीं बढ़ सकी थी.
मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी
सरकारी दवाएं ले जाने का मामला संज्ञान में आया है, हम मामले की जांच करवा रहे हैं. जांच के बाद जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी. अगर जरूरत पड़ी तो जिन डॉक्टर के खिलाफ आरोप है उनसे भी पूछताछ की जाएगी. उनके जवाब के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा अस्पताल प्रबंधन को सीसीटीवी कैमरों की जांच के निर्देश दिए गए हैं.
डॉ. उमेश श्रीवास्तव,
प्रभारी सिविल सर्जन
