आदिवासी व्यक्ति की जमीन कलेक्टर की अनुमति के बिना बेचना अवैध

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

जबलपुर: हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने अपने अहम आदेश में कहा है कि कलेक्टर के नीचे के राजस्व अधिकारी की अनुमति से आदिवासी की जमीन का विक्रय किया जाना शून्य है। इस आदेश में साथ हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल ग्वालियर के अध्यक्ष द्वारा आदेश की पुष्टि करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
नर्मदापुरम निवासी आर एन श्रीवास्तव की तरफ से राजस्व मंडल ग्वालियर के अध्यक्ष द्वारा पारित आदेश को चुनौती देते हुए उक्त याचिका दायर की गयी थी।

याचिका में कहा गया था कि सर्वेक्षण क्रमांक 75 में स्थित जमीन 1983-84 खुमान सिंह के नाम पर दर्ज था। इसके बाद वर्ष 1985-1986 में गैर आदिवासी व्यक्ति बालकृष्ण शर्मा ने अपना नाम दर्ज करवाया ली। बालकृष्ण शर्मा ने बेटे ने उक्त जमीन याचिकाकर्ता सहित अन्य व्यक्तियों को बेच दी थी।मूल जमीन मालिक खुमान सिंह के पोते व अनावेदकों को एसडीएम के सक्षम जमीन अपने नाम दर्ज कराने आवेदन दायर किया था।

आवेदन में कहा गया था कि भूमि मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 के तहत कलेक्टर की अनुमति के बिना आदिवासी व्यक्ति की जमीन गैर आदिवासी व्यक्तियों को नहीं बेची जा सकती है। एसडीएम ने खुमान सिंह के पोतो के पक्ष में आदेश पारित किया था। जिसके खिलाफ कलेक्टर,आयुक्त तथा राजस्व मंडल ग्वालियर के अध्यक्ष के समक्ष अपील दायर की गयी थी। अपील खारिज होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है।

याचिकाकर्ता की तरफ से समय सीमा का तर्क दिया गया।एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया है कि आदिवासी व्यक्ति की जमीन बेचने के लिए कलेक्टर से अनुमति प्रदान नहीं की गयी थी। एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि कलेक्टर की अनुमति के बिना किया गया हस्तांतरण शून्य, अमान्य तथा अवैध है।

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