
जबलपुर। प्रदेश में फर्जी तरीके से संचालित नर्सिंग कॉलेज को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस ए के पालीवाल ने अपने आदेश में कहा है कि आईएनसी ने जिन कॉलेजों को मान्यता दी थी, उसमें से कुछ सीबीआई जांच में अपात्र पाये गये थे। युगलपीठ ने आईएनसी को निर्देश दिये कि साल 2018 से 2022 तक प्रदान की गयी मान्यता संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करे। जिससे स्पष्ट अपात्र कॉलेजों को कैसे मान्यता प्रदान की गयी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। याचिका पर अगली सुनवाई 8 अप्रैल को निर्धारित की गयी है।
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि प्रदेश में नियम विरूध्द तरीके से नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे है। नियमों को ताक में रखकर कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गयी है। तत्कालीन अधिकारियों द्वारा मान्यता नियम 2018 में 3 बार संशोधन किए गये थे। जिससे अपात्र कॉलेजों को निरंतर लाभ पहुँचाया गया था। हाईकोर्ट ने नियमों में किये गये सभी संशोधनों की ओरिजनल फाइल पेश करने के निर्देश जारी किये थे। इसके अलावा मेडिकल यूनिवर्सिटी सहित नर्सिंग काउंसिल के द्वारा सभी अनसुटेबल नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता से जुड़ी ओरिजनल फाइल पेश करने के निर्देश दिये थे। याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान मान्यता और संबद्धता संबंधित ओरिजनल फाईल प्रस्तुत की गयी थी। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया था कि ओरिजनल फाइल का निरीक्षण कर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करें।
याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कुछ छात्रों ने एनरोलमेंट नहीं दिये जाने को चुनौती देते हुए आवेदन दायर किया । युगलपीठ ने ऐसे छात्रों की सूची पेश करने के निर्देश जारी किये है।
