मामला राजबाड़ा क्षेत्र का
इंदौर: यूं तो नगर निगम द्वारा शरह को स्मार्ट बनाने की कोशिशों में लगा रहता है. छोटे कार्य में भी दिखावा ज़्यादा होता है जहां ज़रूरत नहीं वहां भी कार्य किया जाता है और जहां ज़रूरत है वहां तो अधिकारी अनदेखी करते हैं.कुछ वर्ष पहले सिटी बस स्टैंड को लेकर यात्री प्रतीक्षालय स्थान को सुंदर बनाने के कार्य किए गए. इस पर करोड़ों खर्च किए गए लेकिन जब नज़र ऐसे बस स्टॉप पर पड़ती है तो अधिकरियों की प्लानिंग में सिर्फ दिखावा ही दिखाई देता है. कुछ ऐसा ही नज़ारा राजवाड़ा के बस स्टेण्ड पर दिखाई देता है. यहां शहर का मुख्य क्षेत्र है जहां प्रतिदिन हजारों लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं.
राजवाड़ा चौक पूरे शहर का मुख्य सिटी बस स्टैंड भी कहा जाता है. यहां से सभी रूट पर चलने वाली बसों का आवागमन होता है लेकिन यहां यात्री प्रतीक्षालय व्यावस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है. न तो यात्रियों के लिए बैठने के लिए कोई सुविधा है और न ही इस भीषण गर्मी में जल व्यवस्था. यात्री घंटों बस के इंतेज़ार में खड़े रहते हैं. इनमें महिलाओं की गत बनी रहती है मजबूरी में उन्हें नीचे गंदी सड़क पर ही बैठना पड़ता है. यहां नज़ार प्रतिदिन दिखाई देता है जबकी नगर निगम की पीली जीप और उसमें बैठें अधिकारी दिन भर राजवाड़े के गेट पर खड़े रहता है.
इनका कहना है
इस स्थान पर ऐसे खुले और अनुपयोगी स्थान भी है, जहां कम से कम महिलाओं और बच्चों के लिए तो कुर्सी लगाई जा सकती है. जैसे कि बगीचे के आस-पास फुटपाथ पेड़ों के नीचे.
– राज़िक अंसारी
कही विकास होता ही नहीं है तो कहीं कार्य के बाद रख-रखाव के चलते बड़ी हानि होती है. जिसको बड़े-छोटे अधिकारी द्वारा अनदेखा भी किया जाता है. राजवाड़े पर तो व्यवस्था ही गायब है.
– अंकित मगरे
सुबह से लेकर रात तक यात्रियों का तांता लगा हुआ रहता है. सभी यात्री परेशान होते हैं. यहां मुख्य बाज़ार है. यहां पर जल्द ध्यान देना चाहिए. बाहर से आने वाले लोग क्या सोचते होंगे.
– बसंत शर्मा
