घोषणा हुए बीत गए सालों, डीपीआर में ही अटका प्रोजेक्ट

जबलपुर: इंतहा हो गई इंतजार की, आयी न कुछ खबर…। ये पंक्तियां सुनकर भले ही आपको किसी फिल्मी गीत की याद आ गई हो लेकिन यह शहर को मिली रोपवे की सौगात पर सटीक बैठ रही है। दरअसल रोप-वे परियोजना जबलपुर में ट्रैफिक के बढ़ते हुए दबाव को कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट की घोषणा हुई थी लेकिन सालों बीत गए परंतु ये धरातल पर नहीं उतर सका है। मामला डीपीआर की मंजूरी पर ही अटका हुआ है। जबकि शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से अराजक हो चली है। हर दिन जहां वाहनों की संख्या बढ़ रही है तो अतिक्रमण भी बढ़ रहे है। ऐसे में शहर हर दिन जाम से जूझता है।
2023 में मिली स्वीकृति
विदित हो कि ट्रैफिक दबाव को कम करने शहर में दो रोप वे बनाने के लिए केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 2023 जुलाई में परियोजनाओं को अन्तिम रूप से स्वीकृति दी थी। लेकिन अब तक यह प्रोजेक्ट जमीन में नहीं उतर सका है।
यह मार्ग हुए थे तय
जबलपुर शहर में दो रोप वे बनाने की घोषणा हुई थी जिसमें जिनमे पहला एम्पायर चौक- सदर- कटंगा-रामपुर-साउथ एवेन्यू माल-ग्वारीघाट-नर्मदा मंदिर से ग्वारीघाट गुरुद्वारा तक एवँ दूसरा सिविक सेंटर -मालवीय चौक-लॉर्डगंज-बडा फुहारा से बल्देवबाग तक तय हुआ था।
इनका कहना है
रोपवे प्रोजेक्ट काफी बड़ा है जिसकी डीपीआर और रोपवे के मार्ग आदि बिन्दुओं पर काम चल रहा है। डीपीआर का काम भी दिल्ली से चल रहा है।
अमृत लाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर

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