राज्य सभा में स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार के काम की सराहना, ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ाने का सुझाव

नयी दिल्ली, 19 मार्च (वार्ता) स्वास्थ्य मंत्रालय के काम काज पर राज्य सभा में चर्चा के दौरान बुधवार को जहां सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सरकार की आयुष्मान योजना और जन औषधि केंद्र योजनाओं को देश में गरीबों के लिए स्वाथ्य सुविधा के विस्तार की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताया वहीं विपक्षी दलों ने सरकार पर विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों के साथ धन के आवंटन में भेद-भाव करने का आरोप लगाया।

कई सदस्यों ने खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं और बढ़ाए जाने की जरूरत पर बल दिया।

सदन में मंगालवार को इस विषय पर अधूरी रही चर्चा की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी के भुवनेश्वर कलिता ने कहा कि सरकार ने पिछले दस साल में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, चिकित्सा – शास्त्र की पढ़ाई के लिए सीटों के विस्तार का उल्लेख किया ।

उन्होंने आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड योजना को विश्व की अपने किस्म की अनूठी योजना बताया और कहा कि इसके साथ जन औषधि केंद्र स्वास्थ्य सेवाओं को गरीबों की पहुंच के अंदर लाने में बड़ा योगदान कर रही है।

जनता दल यूनाईटेड के संजय कुमार झा ने देश में डाक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए मेडिकल काॅलेजों की सीट बढ़ाने में मोदी सरकार की उपलब्धियों की सराहना की है। उन्होंने बिहार में पटना के बाद दरभंगा में दूसरे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में शिलान्यास करने के लिए प्रधानमंत्री का ध्यन्यवाद किया।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत में 12 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दी है। इनमें करीब साढ़े चाल लाख लोग ऐसे लाभान्वित हो रहे हैं जो 70 प्रतिशत से ऊपर है। ओला उबर चालने वालों और आंगनवाड़ी बहनों आदि को भी इस योजना को लाने के निर्णय को उन्होंने क्रांतिकारी बताया।

इसके साथ ही उन्होंने एमबीसीए के साथ साथ और ऊंचे स्तर की पढ़ाई की सीटें बढ़ाने का सुझाव दिया।

चर्चा में भाग लेते हुए सुश्री ममता मोहंता (भाजपा) ने कहा कि आयुष्मान योजना से कैंसर जैसी बीमारी का इलाज भी गरीब लोग करा पा रहे हैं। उन्होंने अगले पांच वर्ष में मेडिकल कालेज की सीटों में 75000 की वृद्धि तथा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेली मेडिशिन सुविधा करने और ऐसी अन्य पहलों सराहना की।

उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से ओडिशा में मयूरभंज जिले में एक एम्स बनाने की सरकार से अपील की।

आरएलएम पार्टी के उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि आयुष्मान योजना के लिए मोदी सरकार का जितना धन्यवाद किया जाए वह कम है। उन्होंने कहा कि बड़ी बामारियों के मद्देनजर अभी भी बिहार में सुविधाओं की कमी है और वहां से लोग दिल्ली एम्स के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली एम्स में भीड़-भाड़ के कारण लोगों को आपरेशन के लिए एक-एक साल तक का इंतजार करना होता है जबकि डाक्टर जानते हैं कि मरीज के लिए दो माह से अधिक इंतजार जोखिम भरा हो सकता है।

उन्होंने बिहार में सासाराम -औरंगाबाद के आस पास एक और एम्स बनाने पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बहुत से प्राइवेट अस्पताल को लूट का अड्डा बन गए हैं और इस पर अंकुश लगाने के लिए कोई नियमन व्यवस्था की जरूरत है।

जनता दल एस के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बजट प्रावधान को दस साल पहले की तुलना में करीब तीन गुणा किए जाने के लिए प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का ध्यन्यवाद किया।

उन्होंने सरकार का ध्यान हार्ट अटैक से मौतों के बढ़ने पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में हार्ट अटैक पीड़ितों के लिए स्वास्थ सुविधाओं के विस्तार का आग्रह किया। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि इनमें 13 प्रतिशत घटनाएं ऐसे लोगों की हो रही है जो 45 वर्ष से कम आयु के है। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में दिल का दौरा पड़ने से मौतों का औसत 22-25 प्रतिशत , थ्री टीयर , टू टीयर शहरों में 12 से 15 प्रतिशत और बड़े शहरों में 4-8 प्रतिशत है। इसे देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरत पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

श्री देवगौड़ा ने सुझाव दिया कि दिल का दौरा पड़ने पर रोगी की हालत स्थिर करने के प्रारंभिक उपचार के खर्च को आयुष्मान कार्ड योजना के अंतर्गत लाने का विचार किया। उन्होंने दिल और दिमाग का दौरा पड़ने पर मरीजों को संभालने के लिए केंद्र (हब) और तीली (स्पोक्स) मॉडल पर पूरे देश में सुविधाएं किए जाने का भी सुझाव दिया।

उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों जैसे जमीनी स्तर के चिकित्साकेंद्रों पर पर स्टॉफ की कमी का भी जिक्र किया।

भाजपा के सदानंद महालू शेट तानवाडे ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को विकसित भारत की बुनियाद का एक पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने नागरिकों को हवनीय और अच्छी स्वास्थ्य देने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। 2013-14 में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बजट आवंटन 37330 करोड़ रुपये था। इस बार के बजट में 99858 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के डा वी शिवादासन ने आशा कार्यकर्ताओं को बेहद कम मानदेय दिये जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान खरीदी गयी मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र के निजीकरण का भी आरोप लगाया।

भाजपा की सीमा द्विवेदी ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट आवंटन बढाकर इस क्षेत्र को मजबूत बनाने का कार्य जारी रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 70 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को आयुष्मान योजना के तहत लाकर बुजुर्गों को बड़ी राहत प्रदान की है। उन्होंने सामुदायिक केन्द्रों में महिला डाक्टरों की नियुक्ति को अनिवार्य करने का सुझाव दिया।

भाजपा की सुमित्रा बाल्मीक ने कहा कि सरकार की सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों का मुफ्त उपचार कराने की योजना से गरीब वर्ग के लोगों को विशेष रूप से फायदा मिलेगा।

भाजपा के अमर पाल मौर्य ने पिछली सरकारों पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को नजरंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अमीर और गरीब दोनों को समान चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में अनेक कदम उठाये हैं।

तेलुगु देशम के मस्थान राव यादव बीघा ने आंध्र प्रदेश में प्रयोगशालाओं की स्थापना की मांग की। उन्होंने डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया।

भाजपा के लहर सिंह सिरोया ने कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती बेहद जरूरी है।

कांग्रेस की रेणुका चौधरी ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य बजट में कटौती की है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं के तहत निर्धारित राशि को खर्च नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि पैसे निर्धारित होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। देश में एनीमिया की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि टी बी की बीमारी का समुचित उपचार नहीं किया जा रहा है और वह नये नये रूप में लोगों का जीवन खत्म कर रही है। उन्होंने व्हील चेयर जैसी जरूरी स्वास्थ्य वस्तुओं पर जीएसटी वापस लिये जाने की मांग की। उन्होंने कैंसर के रोगियों को विमान और ट्रेन यात्रा में छूट दिये जाने की मांग की।

बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने विभिन्न टेस्टों की कीमत तथा डाक्टरों की फीस के संबंध में मानक स्थापित किये जाने की मांग की।

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