नयी दिल्ली, 17 मार्च (वार्ता) लोकसभा में सोमवार को रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने रेलों में भीड़ कम करने और यात्रियों की सुरक्षा के पर्याप्त उपाय करने की मांग की।
कांग्रेस की वर्षा गायकवाड़ ने चर्चा की शुरुआत करते हुये कहा कि रेलों में यात्रियों को जानवरों की तरह घुसने को मजबूर होना पड़ता है। रेलगाड़ियों और स्टेशनों पर सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं हैं। मुम्बई की लोकल ट्रेनों में बैठने की जगह तो क्या खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती। स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ अधिक होने की वजह से भगदड़ जैसी स्थिति निर्मित होती है और लोगों की जानें जाती हैं। इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। उन्होंने कुछ दिनों पर पहले नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की घटना का जिक्र करते हुये कहा कि उस समय अधिकारी पीड़ितों की मदद करने के बजाय घटना को छिपाने और सरकार को बचाने का प्रयास करते रहे।
सुश्री गायकवाड़ ने ट्रेनों की संख्या काफी कम होने की तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुये कहा कि 140 करोड़ लोगों के देश में मात्र 13 हजार ट्रेन हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेनों और स्टेशनों पर सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं हैं। ट्रेन और प्लेटफार्म पर प्राय: आपराधिक घटनायें होती रहती हैं, लेकिन कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता। रेलवे के मुख्य आय के प्रमुख स्रोत माल ढुलाई से होने वाली आमदनी निरंतर कम होने का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि ऐसा क्यों हो रहा है, इस पर गंभीरता से ध्यान दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने ट्रेनों और स्टेशनों पर स्वच्छता, पेयजल, भोजन, यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के संचालन में समय की पाबंदी पर विशेष ध्यान दिये जाने की मांग की।
तृणमूल कांग्रेस की शताब्दी राय ने यात्रियों की सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान दिये जाने की मांग करते हुये कहा कि मुआवजा हादसे के शिकार परिजन को कभी वापस नहीं ला सकता। उन्होंने ट्रेनों में यात्रियों की होने वाली भीड़भाड़ पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि छह लोगों के बैठने की जगह पर 20-20 लोग बैठते हैं। उन्होंने ट्रेनों में आरक्षण के लिये यात्रियों की लंबी प्रतीक्षा सूची पर सवाल उठाते हुये कहा कि टिकटों के रद्द करने पर लोगों के काफी पैसे कट जाते हैं, जिसे रोका जाना चाहिये।
सुश्री राय ने रेल मंत्री से लोकल ट्रेनों पर भी पर्याप्त ध्यान देने की मांग करते हुये कहा कि वंदेभारत और बुलेट ट्रेन पर ही सारा जोर देने से सामान्य यात्रियों की समस्यायें हल नहीं हो रही हैं।
