
पन्ना (सुरेश पाण्डेय )
पवित्र नगरी पन्ना में होली के बाद तृतीया को एक मात्र भगवान युगल किशोर जी सखी वेश धारण कर महारानी राधा के साथ होली खेलते हैं इस परंपरा को समूचे बुंदेलखंड के लोग बडे उत्साह के साथ मनाते हैं और हजारों श्रृद्धालु इस दिन श्री युगल किशोर जी मंदिर पन्ना पहुंचते हैं। किशोर जी मंदिर के पुजारी से हासिल जानकारी के अनुसार चैत्र माह की तृतीया 16 मार्च को यहां भगवान रात्रि मे 12 बजे सखी वेश धारण करेंगे जिनके सखी वेश के दर्शन रात्रि 12 बजे से 1 बजे तक होंगे तथा 17 मार्च को ही प्रातः 5 बजे से 10 बजे तक भगवान श्री युगल किशोर जी राधा रानी के संगे होली खेलेंगे। इस अनुपम दृश्य को देखने तथा परम्परा को निभाने के लिए हजारों श्रृद्धालु समूचे बुंदेलखंड से आएंगे। इस दिन भगवान युगल किशोर महारानी राधा के वस्त्र घांघरा एवं चोली पहनते हैं और सिर पर चुनरी डालते हैं वहीं राधा रानी अपने सिर में मुकुट धारण कर हाथों मे बांसुरी धारण कर लेती हैं। वर्ष में मात्र एक बार सजने वाली भगवान के सखी वेश की इस मनोरम झांकी के दर्शन के लिए दर्शनार्थी हजारों की संख्या में पहुंचते हैं।
भाई दोज की रात से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी जाती है।
ज्ञात हो कि भगवान इस सखी वेश की झांकी एक बार होली के बाद तृतीया के दिन सजायी जाती है जो भाई दोज की रात के 12 बजे के बाद इस झांकी को सजाया जाता है और इसके बाद प्रातः काल मंगल आरती से लेकर दिन में आज 10 बजे तक तृतीया को भगवान युगल किशोर जी द्वारा राधा संग होली खेलने के साथ श्रृद्धालुओं द्वारा भी जमकर होली खेलकर इस परंपरा को जीवंत किया जाता है।
वृंदावन की तर्ज पर हर कार्यक्रम होता है आयोजितः-उल्लेखनीय है कि मन्दिरों के शहर पन्ना में स्थित श्री जुगुल किशोर जी का मन्दिर जन आस्था का केन्द्र है। इस भव्य और अनूठे मन्दिर में रंगों का पर्व होली वृन्दावन की तर्ज पर मनाया जाता है। तृतीया के इस मन्दिर की रंगत देखते ही बनती है। सुबह 5 बजे से ही महिला श्रद्धालुओं का सैलाब भगवान के सखी वेष को निहारने और उनके सानिद्ध में गुलाल की होली खेलने के लिये उमड़ पड़ता है। ढोलक की थाप और मजीरों की सुमधुर ध्वनि के बीच महिला श्रद्धालु अपने आराध्य की भक्ति और प्रेम में लीन होकर जब होली गीत और फाग गाती हैं तो सभी के पाँव स्वमेव थिरकने लगते। फाग, नृत्य और गुलाल उड़ाने का यह सिलसिला सुबह 5 बजे से 10 बजे तक अनवरत चलता है। यह अनूठी परम्परा श्री जुगुल किशोर जी मन्दिर में साढ़े तीन सौ वर्ष से भी अधिक समय से चली आ रही है जो आज भी कायम है।
