नयी दिल्ली, 12 मार्च (वार्ता) राज्य सभा में बुधवार विपक्ष ने सरकार पर रेलवे में सामान्य जन के हितों के बजाय निजीकरण, प्रीमियम रेलगाड़ियों के परिचालन को प्राथमिकता देने, दुर्घटनाएं रोकने में विफल रहने और विपक्षी पार्टियों की सरकारों वाले राज्यों के साथ रेल परियोजनाओं के मामले में सौतेला व्यवहार करने का आराेप लगाया जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे में तीव्रगति से हो रहे कार्यों की सराहना की।
रेल मंत्रालय के कार्यकरण पर चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस की सदस्य ने डोला सेन ने कहा कि भारत जैसे देश में गरीबों की जरूरत रेलवे की प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा रेलवे का निजीकरण करना है और यही आज भारतीय रेल की समस्या बन गयी है। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने की योजना भी निजीकरण से प्रेरित है पर इस कार्य में भी सरकार कुछ विशेष प्रगति नहीं कर पा रही है।
उन्होंने कहा कि रेल परियोजनाओं के आवंटन और क्रियान्वयन में पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव किया गया।
सुश्री सेन ने अपनी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी के रेलवे मंत्री के कार्यकाल में की गयी पहलों और कार्यों को गिनाते हुए कहा रेलमंत्री अश्चिनी वैष्णव को रेलवे की परिचालन आय बढ़ाने के लिए सुश्री बनर्जी का मॉडल अपनाना चाहिए।
इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समिक भट्टाचार्य ने कहा कि 2012 में तत्कालीन रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि ‘भारतीय रेल आईसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष ) में है, और उसके तुरंत बाद उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था।” श्री भट्टाचार्य ने विपक्षी सदस्यों की टोका-टाकी के बीच कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए रेल बजट में आवंटन तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की तुलना में तीन गुना हो चुका है, लेकिन राज्य सरकार के असहयोग के कारण 43 रेल प्ररियोजनाओं का काम प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जमीन का अधिग्रहण राज्य सरकार को करना होता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में विभिन्न परियोजनाओं के लिए कुल मिला कर केवल 21 प्रतिशत जमीन ही अधिग्रहित की गयी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण होने के कारण रेल लाइनों के दोहरीकरण और रेल सुविधाओं के विस्तार का काम भी कठिन तथा जोखिम भरा हो गया है।
चर्चा में भाग लेते हुए द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सदस्य एनआर एलांगो ने तमिलनाडु में लंबित रेल परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा किए जाने की मांग की। श्री एलांगो ने कहा कि तमिलनाडु के लोगों ने भाजपा को नहीं चुना तो इसके कारण उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है यह कहां तक ठीक कहा जाएगा।
द्रमुक सदस्य ने आरोप लगाया कि सरकार चेन्नई स्थिति इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में विकसित वंदेभारत ट्रेन के विनिर्माण की तकनीकी जानाकरी इटली और रूस की कंपनियों को मुफ्त में दे रही है। उन्होंने के कहा कि वंदेभारत का एक रैक बनाने की आईसीएफ की लागत 70 करोड़ रुपये है जबकि विदेशी कंपनियों का प्रस्ताव 120 करोड़ रुपये का है।
श्री एलांगो ने आरोप लगाया कि रेल मंत्रालय विदेशी कंपनियों को कोच विनिर्माण के लिए इस बात के आधार पर काम कर रहा है कि आईसीएफ में कर्मचारी कम हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि आईसीएफ में तकनीकी कर्मचारियों की संख्या बढ़ा कर उससे ही रैक बनवाना फायदेमंद होगा।
द्रमुक के एन आर एलांगो ने कहा कि रेलवे ने सुरक्षा के लिए कवछ पर 70 हजार करोड़ रुपये व्यय कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद दुर्घटना में कमी नहीं आ रही है। उन्होंने रेलवे से जुड़े उपक्रमों और उसकी सेवाओं का निजीकरण नहीं करने की अपील करते हुये कहा कि अंग्रेजों ने भी रेलवे का मुद्रीकरण किया था लेकिन उसने रेलवे की संपत्ति बेची नहीं थी।
जनता दल सेक्युलर के एच डी देवेगौड़ा ने कहा कि पिछले दस साल से उन्होंने इस सरकार से किसी तरह का मांग नहीं की है, लेकिन पिछले 10 साल में मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे से पिछले 60 साल की तुलना में बेहतर काम किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से ऐसा संभव हो सका है क्योंकि उन्होंने देश को विकसित बनाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में विशेषकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यकाल में रेल दुर्घटनाओं में कमी आयी है। पहले की सरकार में कर्नाटक की अनदेखी की गयी थी, लेकिन यह सरकार 7800 करोड़ रुपये कर्नाटक के लिए आवंटित किया है। रेलवे से जुड़ी कई परियोजनायें शुरू की गयी है। उन्होंने कहा कि जब वे प्रधानमंत्री थे तब कश्मीर में रेलवे के लिए मंजूरी दी थी, लेकिन अब जाकर मोदी सरकार ने इसको पूरा किया है। उन्होंने कर्नाटक के लिए तीन रेलवे लाइन के प्रस्तावों को मंजूर करने की मांग की।
वाईएसआरसीपी के अयोध्या रामी रेड्डी ने कहा कि रेलवे भारत सरकार का व्यावसायिक संगठन है और यह बोर्ड से संचालित होता है। रेलवे अभी अपने बल पर पूंजी निवेश नहीं कर पा रही है बल्कि उसको सरकार से मदद लेनी पड़ रही है। रेलवे को अपने वार्षिक और पंचवर्षीय लक्ष्योें को हासिल करने के लिए किसी बेहतर एजेंसी से सलाह लेनी चाहिए। रेलवे के कुछ क्षेत्रों में निजी क्षेत्रों की सेवायें भी लेनी चाहिए। परिचालन स्तर पर रेलवे की गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। रेलवे को हरित परिचालन पर ध्यान केन्द्रित करने की सलाह देते हुये उन्होंने कहा कि रेलवे में बाहर से निवेश किये जाने की जरूरत है ताकि दक्षता में सुधार हो सके। पूरे देश में बुलेट ट्रेन चलाये जाने की वकालत करते हुये उन्होंने कहा कि रेल मंत्री टेक्नोलॉजी को समझते हैं और उन्हें बेहतर टेक्निकल की जरूरत है ताकि रेलवे की गति बढ़ायी जा सके। तिरूपति में रेलवे जोन बनाने की मांग करते हुये उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में तिरूपति के लिए विशेष ट्रेने चलायी जानी चाहिए।
बीजू जनता दल के शुभाशिष खुंटिया ने पूर्व तटीय रेलवे में कई क्षेत्रों को जोड़ने की अपील करते हुये कहा कि इससे यह जोन अधिक लाभ कमा सकेगा। पूर्व तट हर साल 25 हजार करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करता है और 10 वर्षाें में 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की हिस्सेदारी रही है जबकि पूर्व तट को हर वर्ष 10 हजार करोड़ ही मिलता है। उन्होंने औडिशा को रेलवे की ओर से पूर्ण हिस्सेदारी नहीं मिलने का आरोप लगाते हुये कहा कि उनके प्रदेश में रेलवे ट्रेक घनत्व बहुत कम है। उनका प्रदेश रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में पर्वतीय राज्यों को छोड़कर सबसे पिछड़ा है।
राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद रेलवे के किराये में जिस से वृद्धि की गयी है क्या रेलवे यात्रियों के लिए उस हिसाब से सुविधाओं में बढोतरी हुयी है। रेलवे में सुरक्षा के लिए कवच लगाया जा रहा है, लेकिन इस दौरान दुर्घटनाओं में अब बड़े पैमाने पर लोगों की मौत हुयी है। उन्होंने रेलवे में साफ सफाई के मुद्दा को उठाते हुये कहा कि लालू जी के कार्यकाल में कुलियों के लिए कमा किया था। रेलवे ने 90 हजार करोड़ रुपये का लाभ कमाया था। रेलवे हमारे जीवन की लाइफलाइन है। पुरानी ट्रेनों को बंद नहीं किया जाना चाहिए। तीन लाख से अधिक नौकरियां खाली है। सरकार इन पदों को भरने के लिए क्या कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम लोगों को किफायती सेवायें प्रदान करना होना चाहिए न:न कि एक करोबारी की तरह लाभ कमाना। लालू जी के कार्यकाल में 2005 में डेडिकेटेड माल ढुलाई कोरिडॉर बनाया गया था और अभी भी वही एक मात्र है।
श्री यादव को बीच में हस्तक्षेप करते हुये मत्सय पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह ने कहा कि श्री लालू यादव के कार्यकाल में रेलवे में इतना ओवरलोडिंग किया गया कि ट्रेक पर असर पड़ा और अब उसका असर दिख रहा है। इस पर राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने कड़ी आपत्ति जताते हुये कहा कि जब कोई सदस्य बोलता है तो बीच में कैसे कोई हस्तक्षेप कर सकता है चाहे वह केन्द्रीय मंत्री ही क्यों न हो।
इस पर पीठासीन सभापति राजीव शुक्ला ने कहा कि नियम के तहत श्री यादव की अनुमति से ही उन्होंने केन्द्रीय मंत्री को हस्तक्षेप करने की अनुमति दी है।
आम आदमी पार्टी के डा.अशोक कुमार मित्तल ने रेलवे के लिए अलग बजट की व्यवस्था दोबारा शुरू करने की मांग की। उन्होंने ट्रेनों में टिकट बुकिंग प्रणाली की जटिलता का मुद्दा उठाया और कहा कि आईआरसीटीसी की वेबसाइट को आसानी से हैक किया जा सकता है।
उन्होंने ट्रेनों के किराये, खाने और साफ सफाई जैसे मुद्दे भी उठाये। श्री मित्तल ने कहा कि रेलवे के सभी स्टेशनों पर दिव्यांगों के लिए सुगम सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि जब भारत की दुनिया में सबसे अधिक आबादी है तो उसका रेल नेटवर्क दुनिया में चौथे नम्बर पर क्यों है। उन्होंने कहा कि रेलवे का विस्तार हमारी व्यवस्था के आकार के हिसाब से नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 29 दुर्घटनाओं में 300 से अधिक लोग मारे गये।
समाजवादी पार्टी के राजजीलाल सुमन ने रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसे छुड़ाकर इस पर रेलवे कर्मचारियों के आवास बना देने चाहिए। उन्होंने कहा कि रेलवे में खिलाड़ियों का कोटा पांच से बढाकर 10 प्रतिशत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि रेलवे के अस्पतालों की हालत खराब है और इनमें पर्याप्त डाक्टर भी नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बंद की गयी ट्रेनों को फिर से शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने आगरा रेलवे स्टेशन से होते हुए और ट्रेनों को चलाये जाने का भी अनुरोध किया।
आईयूएमएल के अब्दुल वहाब ने केरल में तीसरी वंदे भारत ट्रेन चलाये जाने की मांग की। उन्होंने सबरीमाला परियोजना तक ट्रेनों की संख्या बढाये जाने का भी सुझाव दिया।
भाजपा की माया नारोलिया ने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय रेल ने एक बड़ा बदलाव देखा है। उन्होंने कहा कि विद्युतीकरण के चलते भारतीय रेलवे का नेटवर्क दुनिया के बड़े हरित नेटवर्क में शामिल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने रेलवे आधुनिकीकरण को गति नहीं दी और रेलवे की उपेक्षा की।
जद यू के संजय झा ने महाकुंभ के दौरान रेलवे की ऐतिहासिक भूमिका की सराहना की। उन्होंने बिहार के लिए रेलवे का बजट एक हजार करोड़ रूपये से अधिक किये जाने के लिए केन्द्र सरकार का आभार प्रकट किया। उन्होंने पटना से नयी दिल्ली के लिए वंदे भारत ट्रेन चलाने के लिए भी धन्यवाद दिया।
कांग्रेस के नसीर हुसैन ने कहा कि देश की आबादी के अनुसार रेलवे का नेटवर्क नहीं बढ रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे गरीब और आम आदमी के दायरे से बाहर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे में तीन लाख से अधिक पद खाली हैं और इनमें से अधिकतर सुरक्षा से संबंधित तकनीकी पद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर भाजपा शसित राज्यों में रेलवे की उपेक्षा की जा रही है और विपक्ष के सांसदों की मांगे भी नजरंदाज की जा रही हैं। श्री हुसैन ने रेलवे स्टेशनों के निजीकरण का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस के नसीर हुसैन ने कहा कि देश की आबादी के अनुसार रेलवे का नेटवर्क नहीं बढ रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे गरीब और आम आदमी के दायरे से बाहर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे में तीन लाख से अधिक पद खाली हैं और इनमें से अधिकतर सुरक्षा से संबंधित तकनीकी पद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर भाजपा शसित राज्यों में रेलवे की उपेक्षा की जा रही है और विपक्ष के सांसदों की बातें भी नजरंदाज की जा रही हैं। श्री हुसैन ने रेलवे स्टेशनों के निजीकरण का भी आरोप लगाया। उन्होंने बुलेट ट्रेन को चलाने में हो रही देरी का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि कोरोना से पहले पत्रकारों सहित जिन वर्गों को किराये में छूट मिल रही थी उसे बहाल किया जाये।
