सियासत
भाजपा अध्यक्ष के चुनाव की कवायद तेज हो गई है. प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी बनाए गए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इसी सप्ताह भोपाल आ सकते हैं।उनके भोपाल आने के बाद वरिष्ठ नेताओं के साथ रायशुमारी होने की बात कही जा रही है. सूत्रों का कहना है कि होली के बाद कभी भी मप्र को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है. भाजपा ने 2003 में 10 साल सत्ता में रहने वाली कांग्रेस को हटाकर प्रदेश में अपनी सरकार बनाई। इसके बाद अपनाए गए फार्मूले ने भाजपा को मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है. जिसके अनुसार भाजपा ने अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा ओबीसी वर्ग से और प्रदेश अध्यक्ष स्वर्ण को बनाया है. हालांकि इस बार मुख्यमंत्री के साथ ही दो उपमुख्यमंत्री बनाने से जातिगत समीकरण को लेकर कई नेता रेस में शामिल हो गए है.
2003 से अब तक भाजपा ने प्रदेश को चार मुख्यमंत्री दिए. इसमें उमा भारती, बाबू लाल गौर, शिवराज सिंह चौहान और डॉ. मोहन यादव के नाम शामिल हैं. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष की बात करें तो प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा कैलाश जोशी, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा, नंदकुमार सिंह चौहान, राकेश सिंह और वीडी शर्मा को मिला जो सभी स्वर्ण वर्ग से आते हैं. हालांकि कुछ समय के लिए बीच में शिवराज सिंह चौहान और सत्यनारायण जटिया को भी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन यह बहुत कम समय के लिए थी. बहरहाल, अगले प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए बैतूल से विधायक और पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल का नाम तेजी से आगे आया है.
खंडेलवाल को संघ, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पार्टी के अन्य नेताओं का समर्थन मिल रहा है. हेमंत खंडेलवाल के पिता स्व. विजय खंडेलवाल भाजपा के सांसद रह चुके हैं. पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया संगठन के एक कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं. हालांकि, वह 2023 के विधानसभा चुनाव में हार गए थे, लेकिन पार्टी उन्हें एक बार फिर सक्रिय करना चाहती है. इससे पहले नरेंद्र सिंह तोमर, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह क्षत्रिय वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. ऐसे में इस वर्ग से भी कोई नाम आ सकता है.
वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता फग्गन सिंह कुलस्ते आदिवासी वर्ग से आते हैं और मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग की अहमियत को देखते हुए उनकी दावेदारी काफी मजबूत हो सकती है. हालांकि उनकी उम्र उनके लिए बड़ी बाधा बन रही है. इसी वर्ग से सुमेर सिंह सोलंकी, दुर्गादास उइके के नाम की भी चर्चा है.
इस बार संगठन किसी महिला को भी जिम्मेदारी सौंप सकता है। इसमें पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस, सांसद हिमाद्री सिंह, कविता पाटीदार के नाम की भी चर्चा है.
