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23 मार्च को परिपालन रिपोर्ट के साथ हाजिर होने के आदेश
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश का पालन न होने के मामले को सख्ती से लिया। जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में लोक शिक्षण संचालनालय कमिश्नर शिल्पा गुप्ता के खिलाफ दस हजार रुपये का जमानती वारंट जारी किया है। युगलपीठ ने उन्हें कम्पलाईज रिपोर्ट के साथ 23 मार्च को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिये हैं।
दरअसल यह मामले में हरिओम यादव सहित करीब पचास अभ्यर्थियों की ओर से दायर किये गये है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह व शिवांशु कोल ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि आवेदक सहित पचास से अधिक शिक्षकों को मेरिट के आधार पर अनारक्षित वर्ग में ट्रायबल वेलफेयर स्कूल में की गईं पदस्थपना को अवैधानिक मानते हुए उनकी पहली पसंद के अनुसार याचिकार्ताओ के वर्ग में डीपीआई के स्कूल में चार सप्ताह के भीतर पदस्थापना करने हेतु कमिश्नर डीपीआई को निर्देशित किया गया था। निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी न्यायालय के आदेश को तवज्जों नहीं दी गई, जिस पर कई अभ्यार्थियों की ओर से अवमानना याचिकाएं दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से दायर मामले में न्यायालय ने 10 फरवरी 2025 को डीपीआई आयुक्त शिल्पा गुप्ता को नोटिस जारी कर 3 मार्च के पूर्व जवाब तलब किया था। आवेदक की ओर से दलील दी गई कि नोटिस की तामीली के बावजूद भी अनावेदक की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है और न ही महाधिवक्ता कार्यालय से संपर्क किया। इतना ही नहीं आवेदक की ओर से कहा गया कि अनावेदक के खिलाफ कई अवमानना याचिकाएं लंबित है, लेकिन किसी भी प्रकरण में उनकी ओर से कोई रिस्पांस नहीं दिया जाता। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने आयुक्त शिल्पा गुप्ता के खिलाफ जमानतीं वारंट जारी कर उन्हें 23 मार्च को उपस्थित रहने के निर्देश दिये है।
