पीसीपीएनडीटी सामाजिक और नैतिक संकल्प भी – शुक्ल

भोपाल, 04 मार्च (वार्ता) उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आज कहा कि पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम का महत्व केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक संकल्प भी है, जो लिंगानुपात को संतुलित करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लागू किया गया है।

श्री शुक्ल ने आज यहां इस अधिनियम के तहत गठित राज्य सुपरवाइजरी बोर्ड की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह अधिनियम उन सभी चिकित्सा प्रक्रियाओं और तकनीकों पर रोक लगाता है, जिनका दुरुपयोग भ्रूण के लिंग निर्धारण और कन्या भ्रूण हत्या के लिए किया जा सकता है।

उप मुख्यमंत्री ने पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम अंतर्गत अनिवार्य “फॉर्म- एफ़” अपलोड की स्थिति और प्रावधान अंतर्गत की गयी कार्यवाहियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये कि ऐसे क्षेत्र जहां लिंगानुपात विपरीत है, वहाँ सघन कार्रवाई और नियमित मॉनिटरिंग की जाये।

प्रदेश में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत कुल पंजीकृत संस्थाओं की संख्या 2884 है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नियमित निगरानी कर अब तक कुल 352 कार्रवाई की गईं, जिनमें पंजीयन निरस्तीकरण और निलंबन की कार्रवाई शामिल हैं। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत 44 वैधानिक कार्रवाई की गईं हैं।

 

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