
मुख्यमंत्री और न्यायाधीशो ं ने वैचारिक समागम का किया उद्घाटन
विक्रमादित्य का न्याय 3 दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ
नवभारत न्यूज़
उज्जैन. पहले एक राजा दूसरे राजा का राज्य हड़प लेता था, सम्राट विक्रमादित्य के बाद यह धारणा बदली और प्रजा की भी सुध ली जाने लगी. आक्रांताओं को उन्होंने पराजित भी किया और उनका मानस भी बदला, सम्राट विक्रमादित्य ने अपनी सेना खड़ी करके जो जैसा था उसको वैसा ही जवाब दिया, कइयों को सीमा के बाहर भी कर दिया. सम्राट विक्रमादित्य ने दो टूक कहा था कि हमारी सीमा में रहना है तो हमारे हिसाब से रहना होगा. सुशासन को स्थापित किया.
यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही. वे विक्रमादित्य के न्याय संगोष्ठी के शुभारंभ समारोह में संबोधित कर रहे थे. कालिदास अकादमी के पंडित सूर्यनारायण व्यास संकुल में विक्रम उत्सव 2025 के अंतर्गत तीन दिवसीय विक्रमादित्य का न्याय वैचारिक समागम का उद्घाटन हुआ. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि मुख्य न्यायाधिपति मध्यप्रदेश सुरेश कुमार कैत व ग्वालियर हाई कोर्ट के न्यायाधीश अनिल वर्मा का भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मंच पर स्वागत सत्कार किया. इस अवसर पर विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने भी अतिथियों का स्वागत किया.
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि महाकवि कालिदास को सम्राट विक्रमादित्य कश्मीर से लेकर आए, अपने राज दरबार में उन्हें कवि बनाया. जैसे अजीत डोभाल रिटायर होकर घर चले गए थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें वापस बुलाया. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया, श्री गुप्ता ने कहा कि विक्रमादित्य का न्याय वैचारिक समागम एक अद्भुत कार्यक्रम है.
जितने जज होना चाहिए उतने नहींः मुख्य न्यायाधीश
विशिष्ट अतिथि मध्य प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के न्याय सिद्धांत से हमें प्रेरणा लेकर हमारे भारत के न्याय सिद्धांत को मजबूत और पारदर्शिता पूर्वक बनाना होगा. उन्होंने आगे कहा कि अगर आप 50 आदमियों का खाना बनाएं और 500 आ जाए तो क्या होगा, ऐसे ही भारत में जजों की संख्या बहुत कम है और केस बहुत पेंडिंग है. इसकी बहुत चिंता हमें भी है. आम जनता को तुरंत न्याय मिलना चाहिए. 46 लाख 64 हजार केस हाईकोर्ट में पेंडिंग है और सिर्फ 34 जज है. जबकि होना चाहिए 53, यह सोचनीय विषय है, जब मैं आया तो मैंने देखा कितने जज होना चाहिए, तो मैंने सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि यहां कम से कम 85 जज भेजे जाएं. केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार को भी मैंने प्रस्ताव दिया है, वहां से आश्वासन मिला है कि जज भेजे जाएंगे. नई न्याय प्रणाली में हमें चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है, आधुनिक तकनीक से समावेशी न्याय प्रणाली हमें बनानी होगी.
सिर्फ भाषण सुनकर मत चले जाना
मुख्य न्यायाधिपति सुरेश कुमार केत ने कहा कि तीन दिवसीय विक्रम के न्याय की संगोष्ठी जो हो रही है उसमें सिर्फ भाषण सुनकर मत चले जाना, यहां से उच्च शिक्षा लेकर जाना अपने जीवन में उतारे. उन्होंने कहा कि आप हाई कोर्ट के जज हैं, सुप्रीम कोर्ट के जज हैं, आप मंत्री हैं, मुख्यमंत्री हैं, जो भी है, कुर्सी को अपने ऊपर हावी मत होने देना, सम्राट विक्रमादित्य जब न्याय करते थे कुर्सी पर बैठकर तो राजा होते थे, लेकिन वह कुर्सी से उतरते थे तो सामान्य व्यक्ति होते थे, आपको भी सामान्य आदमी की तरह व्यवहार करना है, वरना रिटायरमेंट के बाद बहुत दिक्कत होगी.
