
रिपोर्ट के लिए कई दिनों तक भटकता रहा पिता
संभाग के सबसे बड़े मेडिकल अस्पताल की पैथोलॉजी में सामने आई बड़ी लापरवाही
जबलपुर। संभाग के सबसे बड़े नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है जिसमें मेडिकल अस्पताल की सेंट्रल क्लीनिक पैथोलॉजी में 15 दिन की एक नवजात शिशु की जांच रिपोर्ट में उसकी उम्र 15 साल लिख दी गई जिस कारण अब उसके पिता को बच्चे की जांच रिपोर्ट ही नहीं मिली और वह कई दिनों पर मेडिकल में भटकता रहा। रसीद लेकर जब पिता राजेंद्र कुमार मेडिकल की पैथोलॉजी में गया तो वहां के स्टाफ द्वारा ये कह दिया गया कि आपके बच्चे की रिपोर्ट नहीं मिल रही है आपके बच्चे का दोबारा सैंपल लेना पड़ेगा। ये सुनकर पिता के होश उड़ गए। मतलब स्पष्ट था कि मेडिकल में अब खून की जांच कराना भी मरीजों व उनके परिजनों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। क्योंकि इस दर्जे की लापरवाही मेडिकल प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर रही है।
ये है मामला..
जानकारी के अनुसार राजेंद्र कुमार नामक व्यक्ति की पत्नि ने कुछ दिन पहले एक शिशु को जन्म दिया था जिसकी तबियत अचानक बिगड़ गई थी। फिर परिवारजनों के द्वारा उस नवजात शिशु को बेहतर इलाज के लिए मेडिकल अस्पताल में लाकर भर्ती कराया गया था। इसी दौरान मेडिकल के डॉक्टर्स ने नवजात की जांच के लिए कुछ जांचें लिखीं जिसे करवाने के लिए उसका पिता डॉक्टर की पर्ची के साथ नवजात को लेकर मेडिकल अस्पताल की सेंट्रल क्लीनिक लैब में गया जहां कुछ दिन पहले नवजात का सैंपल लिया गया और रसीद बतौर उसके पिता को एक पर्ची स्टाफ द्वारा दी गई जिसके नवजात की उम्र स्पष्ट रूप से 15 दिन की जगह 15 साल लिख दी गई। जब जांच रिपोर्ट लेने पिता राजेंद्र लैब गया तो उसे परेशान होना पड़ा क्योंकि 15 साल का बच्चा उसका था ही नहीं।
स्टाफ को हुआ गल्ती का अहसास
इसके बाद जब लैब वालों को अपनी गल्ती का अहसास हुआ तो उन्होनें आनन-फानन में अपनी गल्ती सुधारकर पिता राजेंद्र को उनके नवजात की जांच रिपोर्ट सौंप दी जिसमें उसकी उम्र 15 दिन ही लिखी गई। ऐसे में अब ये देखना होगा कि मेडिकल अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदारों द्वारा लैब स्टाफ के उस कर्मचारी के खिलाफ क्या कार्यवाही की जाती है जिसने नवजात की उम्र 15 दिन की जगह 15 वर्ष रसीद में लिख दी जिस कारण कई दिनों तक नवजात के पिता को उसके बच्चे के ब्लड सैपल की रिपोर्ट नहीं मिल सकी और परेशान होना पड़ा।
