हैदराबाद, 24 फरवरी (वार्ता) भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण तैयार किया है।
सीआईआई ने सोमवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि यह पहल देश के तेजी से बढ़ते लॉजिस्टिक्स क्षेत्र और आर्थिक क्षमता का लाभ उठाकर नौकरी के अवसरों में वृद्धि, निवेश आकर्षित करने और आर्थिक विकास को गति देने पर केंद्रित है। भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र ई-कॉमर्स, विनिर्माण और वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) के विस्तार से तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि यह क्षेत्र वर्ष 2030 तक 1.5 करोड़ से 1.7 करोड़ नौकरियों का सृजन करेगा।
भारत लॉजिस्टिक्स में वैश्विक नेता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है क्योंकि इसमें आवश्यक बुनियादी ढांचा और कुशल आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन की मजबूत नींव है। इसके अलावा स्टार्टअप इकोसिस्टम, तकनीकी नवाचार और सरकार की अनुकूल नीतियां इस क्षेत्र के विकास को और गति दे रही हैं।
सीआईआई-इंस्टीट्यूट ऑफ लॉजिस्टिक्स एडवाइजरी काउंसिल के अध्यक्ष आर. दिनेश ने कहा, “सीआईआई की ‘लॉजिस्टिक्स फॉर ऑल’ पहल भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उद्योगों और भौगोलिक क्षेत्रों में कई करियर अवसर प्रदान करेगी और मानव-मशीन सहयोग के माध्यम से नेतृत्व के नए अवसर खोलेगी।”
सीआईआई की रणनीति के तहत टियर 2 और टियर 3 शहरों में विशेष प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे ताकि क्षेत्रीय मांगों को पूरा किया जा सके। यह दृष्टिकोण उद्योग-संरेखित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है, जिससे प्रशिक्षुओं को वैश्विक लॉजिस्टिक्स मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके। इसके अलावा सीआईआई अंतरराष्ट्रीय उद्योगों के साथ साझेदारी करके वैश्विक प्लेसमेंट की सुविधा भी प्रदान करेगा। साथ ही छात्रों को शुरुआती करियर जागरूकता देने के लिए लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को स्कूली शिक्षा से ही जोड़ने की योजना बनाई गई है।
सीआईआई की छह-आयामी रणनीति का उद्देश्य ग्रामीण-शहरी अंतर को पाटना, एमएसएमई और बड़े उद्यमों की जरूरतों को पूरा करना और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में लैंगिक विविधता को बढ़ावा देना है। सीआईआई का मानना है कि यह रणनीति भारत को एक वैश्विक लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला पावरहाउस के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी। इस पहल से न केवल लॉजिस्टिक्स उद्योग में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत होगी।

