
जाम के चलते फसे रहे सैकड़ों वाहन
पिपलिया स्टेशन (जेपी तेलकार)। कृषि उपज मंडी शुक्रवार को सुबह से शाम तक हंगामा होता रहा। सुबह से देर रात तक जाम की स्थिति बनी रही। दोपहर मंडी में किसान व केंटीन कर्मचारी के बीच विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई। लहसुन की बंपर आवक के चलते यह स्थिति बन रही है, इससे मंडी प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। पुलिस व मंडी प्रशासन भी व्यवस्था में सुधार नही कर पाया। जाम के चलते किसान, वाहन चालक व आमजन परेशान होते रहे।
जाम में फसी रही एम्बूलेंस, एक घंटे तक तड़पता रहा घायल:-
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को लहसुन की अधिक आवक के चलते मंडी के बाहर मनासा मार्ग पर एक किलोमीटर गुडभेली तक लहसुन भरे वाहन खड़े रहे। कई बार जाम की स्थिति निर्मित हुई। इस दौरान कुछ किसानों ने अपने वाहनों को मंडी में जल्दी प्रवेश कराने के लिए लाइन से आगे आकर रोड़ पर वाहन खड़े कर दिए, इससे सुबह से ही जाम की स्थिति बनी रही। स्कूल बसें, एम्बूलेंस, यात्री बसें व दुपहिया वाहन चालक घंटों तक जाम में फसे रहे और परेशान होते रहे। पुलिस व मंडी प्रशासन भी जाम खुलवाने के लिए बेबस नजर आया। शुक्रवार शाम ६.३० बजे करीब काचरिया मार्ग पर होली क्रास स्कूल के यहां सड़क दुर्घटना में बाइक सवार चीताखेड़ी निवासी रविन्द्र धनगर व्यक्ति गंभीर घायल हो गया, जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया, आक्सीजन नही होने से घायल को निजी वाहन में स्वास्थ्य विभाग ने नही ले जाने दिया। एम्बूलेंस का इंतजार होता रहा। बाद में ७.३० बजे एम्बूलेंस पहुंची, तब जाकर घायल को मंदसौर रेफर किया जा सकता।
होटल कर्मचारी ने पानी डालकर गीली की लहसुन, विवाद के बाद हुआ समझौता:-
शुक्रवार को कृषि उपज मंडी में स्थित केंटीन (होटल) कर्मचारी ने लहसुन लेकर नीमच से आए किसान मुडंला (नीमच) निवासी मिथुनसिंह के डेढ़ क्विटल लहसुन के ढ़ेर में नली से पानी का छिड़काव कर दिया, इससे लहसुन भीग गई। बताया गया केंटीन के सामने ढ़ेर लगाने के कारण केंटीन कर्मचारी ने लहसुन को नुकसान पहुंचाया। केंटीन कर्मचारी की इस हरकत के चलते किसान नाराज हो गए और हंगामा कर दिया, केंटीन संचालक से बहस होती रही। विवाद बढ़ता देख पिपलिया चोकी पुलिस मौके पहुंची व विवाद शांत कराया। मंडी इंस्पेक्टर कमलेश जैन ने बताया कि विवाद के बाद केंटीन कर्मचारी ने किसान को नुकसान की भरपाई देने का भरोसा दिया, बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और विवाद शांत हो गया।
इस कारण बिगड़ रही स्थिति:-
अंचल के साथ ही राजस्थान व मध्यप्रदेश के दूर-दराज क्षेत्र से भी किसान अपनी उपज बेचने पिपलिया कृषि उपज मंडी आते है। मंडी में जगह नही होने की स्थिति में वे अपना वाहन मंडी गेट के बाहर मुख्य मनासा मार्ग पर लाइन में खड़ा कर देते है। जिन्हें मंडी प्रशासन टोकन भी देता है, लेकिन इसमें अनिमितता होने से स्थिति बिगड़ रही है। साथ ही अंचल के किसान उपज लेकर आए वाहन को जल्दी मंडी में नीलामी कराने के लिए लाइन से आगे लाकर वाहन खड़ा कर रहे है। इससे भी स्थिति बिगड़ रही है और जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। क्षेत्र के किसानों के होने व राजनैतिक दबाब होने से मंडी प्रशासन व पुलिस भी इन पर कार्रवाई नही कर पा रही है। जबकि मंडी में करीब ३० चौकीदार तैनात है इसके अलावा पुलिस बल भी तैनात रहता है। गत् वर्ष लहसुन लेकर आने वाले वाहनों को मंडी गेट के पीछे खड़ा करने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद ही पुनः व्यवस्था बदल दी गई और फिर वाहनों को मुख्य मार्ग पर ही खड़ा किया जाने लगा। बताया गया मंडी के पीछे से वाहनों को प्रवेश कराने के लिए गेट है, जिसे चौड़ा कर पीछे से वाहनों को प्रवेश दिलाने के लिए मंडी प्रशासन ने पहल की थी, लेकिन जनप्रतिनिधि के दबाव के चलते गेट को नही खोला गया। केवल दुपहिया वाहन से लहसुन लेकर आने वाले किसान को ही सुबह पीछे से लहसुन लाने की व्यवस्था की गई है।
नई मंडी का नही शुरु हो पाया काम:-
कृषि उपज मंडी में आवक की अधिकता के चलते मंडी छोटी पड़ने लगी है। आए दिन मुख्य मार्ग पर जाम लगना आम बात हो गई है। करीब तीन वर्ष पूर्व नई कृषि उपज मंडी गुड़भेली में बरखेड़ापंथ मार्ग पर बनना स्वीकृत होकर राशि भी जमा हो चुकी है। लेकिन मंडी प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते कार्य शुरु नही हो पाया। मंडी में कई वर्षों से चुनाव नही होने से भारसाधक अधिकारी के भरोसे मंडी चल रही है। भारसाधक अधिकारी (एसडीएएम) मंडी में समय नही दे पाते है, एसे में प्रतिदिन विवाद व अव्यवस्था हो रही है।
प्रभारी सचिव के भरोसे मंडी:-
एशिया में लहसुन को लेकर पिपलिया कृषि उपज मंडी का जाना-पहचाना नाम है। लेकिन यहां अव्यवस्थाएं काफी है। उदासीनता के चलते किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाहर से उपज लेकर आने वाले किसानों को ५ से ७ दिन तक नीलामी के लिए बारी का इंतजार करना पड़ता है। लहसुन लेकर आए किसान अपनी उपज को मंडी गेट के बाहर वाहनों को लाइन में लगाकर बारी का इंतजार करते है, लेकिन टोकन व्यवस्था सही नही होने व वाहनों के अव्यवस्थित तरीके से खड़ा करने के कारण किसान परेशान होते रहते है व जाम की स्थिति बन जाती है।
