
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (वार्ता) केंद्रीय बजट 2025-26 में मत्स्य पालन क्षेत्र के प्रोत्साहन के लिये 2,703.67 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है और बड़ा हिस्सा मछली कारोबार की मजबूती और मछली पालकों की प्रगति पर केंद्रित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिये है। इस योजना के लिये 2465 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
मत्स्य, पशुधन और डेयरी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मत्स्य पालन क्षेत्र का अगले साल का 2,703.67 बजट
चालू वित्त वर्ष 2024-25 के बजट से 3.3 प्रतिशत अधिक है और यह अब इस क्षेत्र तक का सबसे अधिक कुल वार्षिक बजटीय आवंटन है।
वर्ष 2025-26 के लिये प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना संबंधी 2465 करोड़ रुपये का आवंटन चालू वित्त वर्ष के लिये
इस योजना पर आवंटित राशि से 4.8 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय का कहना है कि मछली पालन और और समुद्री खाद्य निर्यात में भारत की उपलब्धि इस क्षेत्र को सरकार के समर्थन का प्रमाण है।
भारत का समुद्री खाद्य उत्पाद 2003-04 से 2023-25 के दौरान लगभग 10 गुना बढ़ कर 6092 करोड़ रुपये से बढ़कर 60 हजार 523 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और वैश्विक उत्पादन में आठ प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत आज दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। मंत्रालय के अनुसार सरकारी योजनाओं के समर्थन से देश में मछली उत्पादन 2004-24 के बीच 64 लाख टन की तुलना में तीन गुना (184 लाख टन) के स्तर पर पहुंच गयी है। 2013-14 में मछली उत्पादन 95.79 लाख टन था। इस तरह 10 वर्ष में उत्पादन बढ़कर करीब दो गुना हो गया है। वर्ष 2023-24 में समुद्री खाद्य निर्यात करीब 17.82 लाख टन था।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार स्थलीय जल निकायों, तालाबों और झीलों में मछली उत्पादन 2013-14 के 26.78 लाख
टन के स्तर से तेजी से बढ़ते हुये 2023-24 में 77.71 लाख टन तक पहुंच गया।
मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा है, “ पिछले दो दशकों में, भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि और परिवर्तन देखा गया है। तकनीकी प्रगति से लेकर नीतिगत सुधारों तक, 2004 से 2024 की अवधि में ऐसी उपलब्धियां रही हैं, जिन्होंने वैश्विक मत्स्य पालन और जलीय कृषि में भारत की स्थिति को मजबूत किया है। ”
सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और मजबूत बनाने की दिशा में मजबूत नीतिगत उपाय करने के लिये वित्त वर्ष 2015-16 में पांच वर्ष के लिये नीली क्रांति योजना शुरू की थी और इसके लिये 3000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। यह योजना अंतर्देशीय और समुद्री दोनों ही तरह के जलीय कृषि और मत्स्य संसाधनों से मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) की परिकल्पना 2020 में की गयी थी।
इसका उद्देश्य मछुआरों, मछली पालकों और अन्य हितधारकों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण को सुनिश्चित करते हुये मत्स्य पालन क्षेत्र को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाना है।यह 20,050 करोड़ रुपये के निवेश के प्रावधान वाली योजना (2020-21 से 2024-25) के लिये स्वीकृत की गयी थी, जिसे अभी जारी रखने का निर्णय लिया गया है। पीएमएमएसवाई के तहत मछली किसान उत्पादक संगठन (एफएफपीओ), मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ)-एकीकृत एक्वा पार्क और समुद्र में मछली पकड़ने के स्वस्थ उपायों के तहत कृत्रिम रीफ (चट्टानी क्षेत्र) की स्थापना जैसे कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। समुद्र तल पर कृत्रिम चट्टानी क्षेत्र बनाने की योजना के तहत सितंबर 2024 तक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, लक्षद्वीप, कर्नाटक, ओडिशा, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के तट के पास समुद्र में 937 कृत्रिम रीफ की स्थापना को मंजूरी दी गयी है। इन पर में 291.37 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। मत्स्य पालन विभाग ने जलीय कृषि प्रजातियों की आनुवंशिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिये विशिष्ट न्यूक्लियस ब्रीडिंग केंद्र (एनबीसी) नामित किये हैं, जो एनबीसी झींगा जैसी प्रजातियों की उत्पादकता और गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सरकार ने मछली कारोबार का विस्तार करने तथा मछली पकड़ने की स्वस्थ पद्धतियों के विकास में प्रौद्योगिकी के प्रयोग को बढ़ावा देने के भी कदम उठाये हैं। इनमें उपग्रह प्रौद्योगिकी एकीकरण और जीआईएस-आधारित संसाधन मानचित्रण जैसी पहले शामिल हैं। वर्ष 1961 में स्थापित केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान (सीआईएफई), मत्स्य पालन में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिये भारत का अग्रणी संस्थान है, जिसने 4,000 से अधिक मत्स्य पालन विस्तार कार्यकर्ताओं और पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है।
ये प्रशिक्षित लोग स्थायी मत्स्य पालन प्रथाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे समुद्री मत्स्य पालन पर राष्ट्रीय नीति (एनपीएमएफ) 2017 में समुद्री मत्स्य पालन के सभी कार्यों में स्वस्थ पद्धतियों के अपनाया जाना एक मुख्य सिद्धांत है। यह नीति भारत के समुद्री मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन का मार्गदर्शन करती है। समुद्री मछली स्टॉक को दीर्घकालिक आधार पर समृद्धि सुनिश्चित करने के लिये, सरकार ने कई संरक्षण उपायों को लागू किया है। इनमें मानसून के मौसम के दौरान 61 दिनों के लिये समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध और मछली पकड़ने के विनाशकारी तरीकों पर प्रतिबंध जैसी व्यवस्थायें की गयी हैं।
