नयी दिल्ली 13 फरवरी (वार्ता) वक्फ संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति ने जनजातीय भूमि को वक्फ भूमि घोषित करने से रोकने के लिए उचित विधायी उपाय करने की सिफारिश की है।
विपक्ष के हंगामे के बीच समिति की रिपोर्ट गुरूवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गयी। रिपोर्ट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चला जहां विपक्ष ने सदस्यों के असहमति पत्रों को रिपोर्ट में शामिल नहीं करने का आरोप लगाया वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि रिपोर्ट से किसी भी सदस्य के असहमति पत्र या उसके सुझाव को हटाया नहीं गया है।
समिति ने अपनी सामान्य सिफारिशों में कहा है कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत अनुसूचित जनजातियों और जनजातीय भूमि को दी गई सुरक्षा को बरकरार रखा जाना चाहिए और किसी भी खतरे, चाहे वह वास्तविक हो या काल्पनिक, का समाधान किया जाना चाहिए। इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय को अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जनजातीय भूमि को वक्फ भूमि के रूप में घोषित करने से रोकने के लिए उचित विधायी उपाय करने चाहिए।
एक अन्य सिफारिश में समिति ने वक्फ संपत्तियों के साथ उनके दीर्घकालिक जुड़ाव के बारे में किरायेदारों के संघों की लीज नियमों से संबंधित चिंताओं पर विचार करते हुए इनके समाधान की जरूरत बतायी है। इन मुद्दों को पहचानने से किरायेदारों के संघों के लिए कानूनी निश्चितता होगी और वक्फ़ बोडों द्वारा अचानक या अनुचित निर्णयों को रोकने के लिए निष्पक्ष निगरानी प्रणाली भी स्थापित होगी।
समिति का मानना है कि ऐसे उपायों से अनिश्चितता और अस्पष्टता कम होगी तथा अचानक किराए में वृद्धि के प्रभाव को कम किया जा सकेगा और अचानक बेदखली के डर को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा, वक्फ बोर्ड और किरायेदारों के बीच एक सहजीवितापूर्ण और सामंजस्यपूर्ण संबंध को बढ़ावा देने से वक्फ संपत्तियों की समृद्धि सुनिश्चित होगी। इसलिए, समिति ने सिफारिश की है कि मंत्रालय देश भर के वक्फ किरायेदारों की चिंताओं पर विचार कर सकता है और ऐसे कानून प्रस्तावित कर सकता है जो उनके वैध अधिकारों की रक्षा के लिए दीर्घकालिक पट्टे की अनुमति देते हैं।
समिति ने सिफारिश की है कि जिन संपत्तियों को लेकर विवाद नहीं है वे वक्फ बोर्ड के अधीन ही रहेंगी।
