बजट 2025-26 के प्रावधानों से जल संरचना, जल संसाधन प्रबंध मजबूत होगा: भूषण चौधरी

नयी दिल्ली, 13 फरवरी (वार्ता) केन्द्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने गुरुवार को यहां कहा कि इस बार के बजट में जल जीवन मिशन के लिये किये गये आवंटन से जल संरचना को सुदृढ़ करने और सामुदायिक जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा जल संसाधन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।

श्री चौधरी ने राजधानी में ‘अर्थी ग्रीन फाउंडेशन ’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुये कहा, “ इस वर्ष के बजट में जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाया गया है, जिसमें 67 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि 140 करोड़ भारतीयों की जरूरतों को पूरा करने के लिये हम पूरी तरह समर्पित हैं।” कार्यक्रम का विषय था – ‘हरित एवं स्वस्थ भविष्य की ओर भारत की यात्रा!’

मंत्री ने कहा, “ नयी राजकोषीय प्रतिबद्धता से हम जल संरचना को सुदृढ़ कर सकेंगे, सामुदायिक जल संरक्षण परियोजनाओं को बढ़ावा देंगे और जल संसाधन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनायेंगे।” उन्होंने कहा कि यह बजट में जल संसाधनों के बारे में की गयी घोषणा न केवल भारत की जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया कदम है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र के ‘सतत विकास लक्ष्य’ को पूरा करने के प्रति हमारे संकल्प को भी दर्शाता है। ” इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रमों और नीतियों के माध्यम से जल सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है।

श्री चौधरी ने कहा, “ जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और सतत कृषि पद्धतियों को राष्ट्रीय नीति में समाहित कर, हम पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संयोजन से वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच), भूजल पुनर्भरण, और अपशिष्ट जल उपचार जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर रहे हैं। इसके अलावा, विकसित भारत 2047 के विजन के तहत, हम एक सशक्त, आधुनिक और संवेदनशील राष्ट्र के निर्माण की ओर अग्रसर हैं। ”

कार्यक्रम में एचएचईडब्ल्यूए के अध्यक्ष सी पी शर्मा, वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया के निदेशक डॉ रितेश कुमार, संयुक्त राष्ट्र के राष्ट्रीय प्रोजेक्ट एसोसिएट रमेश कुमार, यूएनआईडीओ के राष्ट्रीय प्रोजेक्ट समन्वयक देबजीत दास, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रोफेसर प्रवेश व्यास, जैव विविधता विशेषज्ञ और वैज्ञानिक डॉ फैयाज खुदसर और अन्य गणमान्य उपस्थि थे।

जल शक्ति राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कॉप26 शिखर सम्मेलन 2021 में प्रस्तुत नीति के तहत,

“ भारत ने 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करने और 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लक्ष्य रखे हैं। भारत इनको पूरा करने के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और अटल भूजल योजना जैसी प्रमुख परियोजनाओं से देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता, जल संरक्षण और कार्बन तटस्थता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मंत्री ने कहा कि हमारे इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये सरकार, निजी क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) का मिलकर कार्य करना आवश्यक है।

राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ रमन शर्मा ने कहा, “औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद सभी औद्योगिक इकाइयों को कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की परिवहन प्रणाली से जोड़ा जाना चाहिये। सीईटीपी को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार, काम करना चाहिये, ताकि निर्वहन मानदंडों को प्राप्त किया जा सके। ”

सीएसआईआर-नीरी की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नूर अफशान खान ने कहा, “ स्वास्थ्य, आजीविका और पारिस्थितिकी तंत्र के लिये पर्याप्त गुणवत्ता और मात्रा में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के वास्ते जल सुरक्षा महत्वपूर्ण है। स्वच्छ जल सुनिश्चित करने के लिये सरकार, उद्योगों और व्यक्तियों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। ”

‘अर्थी ग्रीन फाउंडेशन’ की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि पर्यावरण और जलवायु संकट केवल सरकारों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सभी को मिलकर जलवायु संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

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