महाशिवरात्रि पर्व पर महाकाल में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ , 10 लाख भक्तों का अनुमान

उज्जैन: महाशिवरात्रि पर्व पर रविवार को उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में शाम 5 बजे तक 3 लाख 96 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए थे। मंदिर में दर्शन का सिलसिला निरंतर जारी है। शनिवार-रविवार की मध्य रात 2.30 बजे मंदिर के पुजारियों ने गर्भगृह के पट खोले। इसके बाद भगवान महाकाल का पंचामृत आदि से अभिषेक-पूजन कर दिव्य भस्मारती की गई। सुबह मंदिर के मुख्य शिखर का ध्वज भी बदला गया।

भस्मारती के बाद से ही मंदिर में आम दर्शन का क्रम जारी है। 44 घंटे भगवान महाकाल भक्तों को महाशिवरात्रि पर दर्शन देंगे। रातभर मंदिर खुला रहेगा। अब मंदिर के पट 16 फरवरी की रात 11 बजे शयन आरती में बंद किए जाएंगे। आम दर्शन की लाइन शनिवार रात से ही लग गई थी। रविवार की सुबह होते ही भीड़ तेजी से बढ़ने लगी और कतार करीब 2 किलोमीटर तक लंबी हो गई। उज्जैन जिला प्रशासन ने महाशिवरात्रि पर्व के दौरान देशभर से 10 लाख श्रद्धालुओं के उमड़ने का अनुमान लगाया है। सुबह से दोपहर तक तो मंदिर में औसत 30 से 40 मिनट के अंदर श्रद्धालुओं को दर्शन हो रहे थे।

मध्य रात्रि में 2:30 बजे मंदिर के पट खोलने से पहले भगवान महाकाल को परंपरा अनुसार पुजारियों ने प्रथम घंटी बजाकर प्रवेश करते हुए भगवान को जगाया। इसके बाद गर्भगृह में पूजन-अर्चन शुरू हुआ। हरिओम जल अर्पित कर कपूर आरती फिर दूध, दही, घी, शकर और फलों के रस व पंचामृत से अभिषेक पुजारी राघव शर्मा ने किया। भांग व सूखे मेवे के साथ चांदी के आभूषणों से बाबा का शृंगार किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े के संत-महंत ने भस्मी अर्पित की। भस्मारती पुजारी ओम गुरु ने संपन्न की।भस्मारती में पूर्व से अनुमति प्राप्त श्रद्धालु नंदीहाल, गणेश मंडप में बैठे थे।वहीं कार्तिक मंडप से श्रद्धालुओं को चलित दर्शन भी कराए गए। मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव व परिवार के लोगों ने सुबह नंदीहाल से महाकाल के दर्शन किए।

महाकाल गर्भगृह में रातभर महापूजा, आज
सेहरे के दर्शन व दोपहर 12 बजे भस्मारती

महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर भगवान महाकाल की 11 ब्राह्मणों ने शासकीय पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में गर्भगृह में रातभर महापूजा संपन्न की। इस दौरान भगवान महाकाल का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दुर्लभ जड़ीबूटियों, पंचामृत, फलों के रस, भांग, भस्म आदि अनेक प्रकार की सामग्रियों से अभिषेक किया गया। पुजारी आशीष गुरु ने बताया कि अल सुबह तक महापूजा चली। इसके बाद पुजारियों ने गर्भगृह में भगवान महाकाल को सप्त धान्य अर्पित किए। सवा मन फूलों का सेहरा सजाया गया। फूलों की मालाएं पहनाई गई। चांदी का सप्तधान का मुखौटा लगाया गया। सुबह भगवान सेहरे के दर्शन देंगे। सुबह 11 बजे भगवान का सेहरा उतारा जाएगा। इसके बाद दोपहर में 12 बजे दिव्य भस्मारती की जाएगी। वर्ष में केवल एक बार ही महाशिवरात्रि पर्व के दूसरे दिन भस्मारती तड़के 4 बजे की बजाए दिन में की जाती है। महाशिवरात्रि पर श्रद्धालु पहली बार डबल डेकर बसों में बैठकर विभिन्न स्थानों से मंदिर तक दर्शन करने पहुंचे। वहीं लड्‌डू प्रसाद खरीदने के लिए भी काउंटरों के बाहर श्रद्धालुओं की लाइन लगी रही। महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर रविवार की शाम 4 बजे परंपरा अनुसार होल्कर व सिंधिया स्टेट की ओर से गर्भगृह में पूजन, आरती की गई व मिठाई का भोग लगाया गया।

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