भोपाल, 20 मई (वार्ता) सेना के संबंध में टिप्पणी कर विवादों में आए मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह के मामले में आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि यह मामला अब उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है और हम अदालत का फैसला मानने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
श्री शर्मा ने यहां मीडिया के सवालों के जवाब में यह बात कही। इंदौर में आज हुयी राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में मंत्री विजय शाह के नहीं पहुंचने संबंधी सवालों के जवाब में श्री शर्मा ने कहा कि हो सकता है कि इसका कोई व्यक्तिगत कारण रहा हो, लेकिन विजय शाह के संबंध में कल उच्चतम न्यायालय का आदेश आया है। उसके अनुरूप राज्य पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया है। दल जांच करेगा और उसकी रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय के समक्ष जाएगी और फिर से आदेश आ सकता है। हम सभी अदालत का फैसला मानने के लिए बाध्य हैं और उसी के अनुरूप कदम उठाएंगे।
इस बीच विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने तीन सदस्यीय एसआईटी के संबंध में सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर अपनी बात कही। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि एसआईटी में शामिल तीन में से दो पुलिस अधिकारी मंत्री विजय शाह के अधीन काफी पहले कार्य कर चुके हैं। श्री सिंघार का कहना है कि जब 2010 में मंत्री खरगोन जिले के प्रभारी थे, तब के पुलिस अधीक्षक को इस दल में शामिल किया गया है। इसी तरह 2018 में जब एक अधिकारी खरगोन जिले के एसपी थे, तब विजय शाह वन मंत्री थे। उन्होंने कहा कि ऐसे में निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।
मंत्री विजय शाह ने हाल ही में सेना के संदर्भ में इंदौर जिले के महू विधानसभा क्षेत्र में आयोजित सभा में बयान दिया था। इसका वीडियो वायरल होने के बाद बवाल हो गया और उच्च न्यायालय ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद संबंधित मानपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली। विजय शाह ने इसे तुरंत उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। इसके बाद कल उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में एसआईटी गठित करने के आदेश दिए। साथ ही मंत्री की गिरफ्तारी फिलहाल नहीं करने के आदेश भी दिए हैं।
