लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने शासन को सेवा का माध्यम बनाया

जबलपुर। नर्मदा तट स्थित तिलवारा घाट आज इतिहास, श्रद्धा और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बना, जब अखिल भारतीय गडरिया महासभा द्वारा पुण्य श्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की भव्य प्रतिमा एवं अहिल्या वाटिका का लोकार्पण किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, नर्मदा पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच जैसे ही प्रतिमा से आवरण हटाया गया, घाट “लोकमाता अहिल्याबाई अमर रहें” के जयघोष से गूंज उठा। नर्मदा की लहरों पर पड़ती सूर्य की किरणें और पुष्पवर्षा ने दृश्य को अविस्मरणीय बना दिया। यह आयोजन महासभा के 163वें मकर संक्रांति महोत्सव के रूप में, अवधूत दादा गुरु भगवान के सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन, संतगण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

न्याय, सेवा और सनातन संस्कृति की प्रतीक

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने बताया कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को भारत की पहली ऐसी शासिका माना जाता है, जिन्होंने शासन को सेवा का माध्यम बनाया। मुग़ल आक्रमणों से ध्वस्त अनेक मंदिरों का जीर्णोद्धार, तीर्थों का पुनरुत्थान और न्यायप्रिय शासन उनकी पहचान रहा। इसी प्रेरणा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से महासभा ने इस पावन स्थल पर प्रतिमा स्थापना का संकल्प साकार किया।

लोकमाता के आदर्शों से सामाजिक समरसता को मजबूत करें

अखिल भारतीय गडरिया महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोती श्रीपाल ने कहा कि यह आयोजन केवल लोकार्पण नहीं, बल्कि सनातन एकता का उत्सव है। उन्होंने समाज के सभी बंधुओं से आह्वान किया कि लोकमाता के आदर्शों को अपनाकर सामाजिक समरसता को और मजबूत करें। कार्यक्रम में संगठन महामंत्री राजेश श्रीपाल, कृपाल श्रीपाल, जिला अध्यक्ष रामजी श्रीपाल, गणेश पहलवान, सावन, दिनेश श्रीपाल, सत्यनारायण श्रीपाल, सरपंच मुकेश श्रीपाल सहित अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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