बारामूला और कठुआ में हुई मौतों पर उमर की चुप्पी पर महबूबा ने उठाये सवाल

श्रीनगर 11 फरवरी (वार्ता) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) प्रमुख एवं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को बारामूला और कठुआ की घटनाओं पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि वह (श्री अब्दुल्ला) अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे तथा गृह मंत्री से जवाबदेही की मांग करेंगे।

सुश्री मुफ्ती ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान बारामूला और कठुआ में हुई मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि ये घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि बारामूला में सोपोर के एक ट्रक चालक वसीम मीर की नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी गयी। डॉक्टर ने पुष्टि की है कि उसे दुर्घटनावश गोली नहीं लगी थी, बल्कि सीधे गोली लगी थी। बिलावर में माखन दीन नामक व्यक्ति को इस हद तक प्रताड़ित किया गया कि वह आत्महत्या करने पर मजबूर हो गया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इन घटनाओं के बारे में बोलना चाहिए था। उन्होंने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में इन मुद्दों को जोरदार तरीके से न उठाने के लिए श्री अब्दुल्ला की आलोचना की। उन्होंने कहा, “उन्हें (श्री अब्दुल्ला को) गृह मंत्री से कहना चाहिए था कि आप कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति ठीक है और आतंकवाद से लड़ रहे हैं, लेकिन अगर सेना के किसी जवान द्वारा किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो उस जवान की पहचान की जानी चाहिए और उसे दंडित किया जाना चाहिए। हम यह नहीं कह रहे हैं कि पूरी सेना खराब है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि बिलावर में एसएचओ के खिलाफ भी ऐसी ही शिकायतें हैं कि वह युवाओं को गिरफ्तार कर उनसे पैसे वसूल रहा है। जो पैसे नहीं देता, उसे वह आतंकवाद के मामलों में बंद कर देता है। आपने मक्खन दीन का वीडियो देखा होगा। यह दिल दहला देने वाला था। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा महत्वपूर्ण है, लेकिन लोगों की जान की रक्षा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य का दर्जा मिलेगा – आज नहीं तो कल, या कभी बाद में, लेकिन उन लोगों का क्या होगा जिन्होंने इस सरकार को बड़ी संख्या में वोट दिया? अगर लोग जीवित नहीं हैं तो राज्य का दर्जा नहीं हो सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती को सोपोर और जम्मू जाने की कोशिश करने पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा , “किसी भी सुरक्षा अधिकारी ने हमें नहीं बताया कि हमें क्यों रोका गया। हमें बिना किसी स्पष्टीकरण के हमारे घर के अंदर बंद कर दिया गया। यहां तक ​​कि इल्तिजा के सुरक्षाकर्मियों को भी बिना किसी गलती के निलंबित कर दिया गया, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने उनकी जासूसी नहीं की थी।”

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