कलेक्टर ने बैठक में अधिकारियों को दिए निर्देश
वाहनों के साथ पीयूसी प्रमाण पत्र भी रखना होगा अनिवार्य
इंदौर: जिले में वायु प्रदूषण के नियंत्रण हेतु प्रभावी एवं परिणाममूलक प्रयास किये जाएंगे. इसके तहत जिले में सघन अभियान चलाया जाएगा. अभियान के तहत जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम, परिवहन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से निरीक्षण की कार्रवाई की जाएगी. अभियान में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाईयों और वाहनों के विरूद्ध कार्रवाई होगी.
यह जानकारी कलेक्टर आशीष सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिला स्तरीय निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक में दी गई. बैठक में नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा, अपर आयुक्त अभिलाष मिश्रा, अपर कलेक्टर निशा डामोर, संयुक्त संचालक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एस.एन. द्विवेदी, महाप्रबंधक उद्योग एस.एस. मंडलोई सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.
बैठक में कलेक्टर आशीष सिंह ने निर्देश दिए कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सभी विभागों के साथ मिलकर संयुक्त कार्य योजना बनाकर उसका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए. प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाईयों और वाहनों के विरूद्ध कार्रवाई की जाए. यह प्रयास किये जाए कि कोयले से संचालित होने वाली औद्योगिक इकाइयां जल्द ही गैस के संचालन में परिवर्तित हो जाए. इसके लिए सभी संबंधित औद्योगिक इकाइयों से संपर्क कर उन्हें समझाइश दे. समय-सीमा देकर यह कार्य करवाया जाए. समय सीमा में अपनी औद्योगिक इकाईयां गैस में परिवर्तित नहीं करने पर कार्रवाई की जाए.
बिना जांच फिटनेस प्रमाण पत्र जारी न हो
कलेक्टर ने वाहनों के माध्यम से प्रदूषण फैलाने वालों के विरूद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बगैर सूक्ष्म जांच के वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं हो. उन्होंने पोर्टल आधारित पीयूसी प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए. उन्होंने इसके लिए संयुक्त जांच अभियान चलाने के निर्देश दिये और कहा कि फिटनेस और पीयूसी प्रमाण पत्र नहीं रखने वालों के विरूद्ध कार्यवाही हो. ऐसे पीयूसी संचालक जो बगैर जांच के ऑफलाइन पीयूसी प्रमाण पत्र जारी कर रहें है उनके विरूद्ध भी कार्रवाई की जाए. उन्होंने पोर्टल आधारित पीयूसी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सभी पेट्रोल पंपों सहित अन्य स्थानों पर व्यवस्था करने के निर्देश दिए.
पराली जलाने पर हो कार्रवाई
उन्होंने शीतकालीन ऋतु में वायु गुणवत्ता सूचकांक नियंत्रित रखने के लिये विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर समयावधि के अंदर कार्यवाही करने के निर्देश दिए. साथ ही कहा गया कि ओपन बॉयोमास कचरा एवं अलाव जलाये जाने पर कार्रवाई की जाए. ज्यादा धूल उड़ने वाले स्थानों को हॉट स्पॉट के रूप में चिन्हित कर मैकेनिकल स्वीपिंग व नियमित जल छिड़काव किया जाए. शहरों के आस-पास के खेतों/ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाये जाने पर सतत निगरानी रखी जाए. पराली जलाने पर चालानी कार्यवाही की जाए
