सिडनी, 06 फरवरी (वार्ता) ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने संरक्षण प्रयासों में एक बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के माध्यम से पहले कंगारू भ्रूण को सफलतापूर्वक बना लिया है।
क्वींसलैंड विश्वविद्यालय (यूक्यू) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व वाली टीम ने गुरुवार को प्रकाशित एक अध्ययन में विस्तार से बताया कि किस प्रकार उन्होंने एक परिपक्व अंडे में शुक्राणु को इंजेक्ट करके पूर्वी ग्रे कंगारू भ्रूण का उत्पादन किया। यह प्रक्रिया आमतौर पर मानव आईवीएफ में उपयोग की जाती है जिसे इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) कहा जाता है।
प्रमुख शोधकर्ता एंड्रेस गैम्बिनी ने कहा कि यह अभूतपूर्व उपलब्धि ऑस्ट्रेलिया के लुप्तप्राय प्रतिष्ठित मार्सुपियल्स के संरक्षण में सहायक साबित हो सकती है, जिनमें कोआला, वोम्बैट, पोसम और तस्मानियाई डैविल शामिल हैं।
उन्होंने एक मीडिया विज्ञप्ति में कहा “ हम इन अद्वितीय और कीमती जानवरों की आनुवंशिक सामग्री को भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखते हैं जिससे उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।”
उन्होंने कहा कि “हालांकि एक सटीक समयरेखा प्रदान करना मुश्किल है लेकिन निरंतर सहयोग, वित्त पोषण और तकनीकी प्रगति के साथ, हम आशान्वित हैं कि आईवीएफ के माध्यम से एक मार्सुपियल का जन्म एक दशक के अंदर वास्तविकता बन सकता है।”
पूर्वी ग्रे कंगारूओं को उनकी अधिक संख्या होने के कारण शोध का विषय चुना गया।
कृत्रिम गर्भाधान के विपरीत, आईसीएसआई को प्रचुर मात्रा में जीवित शुक्राणु कोशिकाओं की आवश्यकता नहीं होती है, केवल एक को सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है।
श्री गैम्बिनी ने कहा कि टीम अब मार्सुपियल अंडाणुओं और शुक्राणुओं को इकट्ठा करने, संवर्धन करने और संरक्षित करने की तकनीकों को सुधार रही है।

