बहुचर्चित वाटरशेड़ घोटाले की जांच करने पहुंची तीन सदस्यीय राज्य स्तरीय टीम

दिन भर खंगाले दस्तावेज, आज मौके पर जायेगी टीम

नवभारत न्यूज

रीवा, 5 फरवरी, जिला पंचायत रीवा के बहुचर्चित वाटरशेड़ घोटाले की जांच करने तीन सदस्यीय राज्य स्तरीय टीम बुधवार को रीवा पहुंची. जहा दिन भर भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए और जिला परियोजना अधिकारी वाटर शेड़ के मौजूदगी में पूरे रिकार्डो की जांच की गई. संभवत: कल मौके पर स्थल निरीक्षण करने टीम जा सकती है.

उल्लेखनीय है कि रीवा जिला पंचायत में करोड़ो के हुए वाटर शेड़ घोटाले एवं फर्जी सचिव नियुक्ति, आंगनवाडी भवन सहित कई अन्य मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता कमल सिंह बघेल ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के साथ प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास से की थी. जिसके बाद तीन सदस्यीय टीम गठित की गई. 17 दिसम्बर को टीम गठित कर जांच प्रतिवेदन मांगा गया था. बुधवार को अचानक तीन सदस्यीय टीम भोपाल से सीधे जिला पंचायत पहुंची. टीम में संयुक्त संचालक पंचायती राज भोपाल अरूण श्रीवास्तव, सहायक लेखा अधिकारी राजीव गांधी जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन भोपाल प्रेम सिंह नेगी एवं डा0 दुर्गेश मित्तल तकनीकी विशेषज्ञ राजीव गांधी जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन शामिल है. तीन सदस्यीय टीम जिला पंचायत कार्यालय में जैसे ही पहुंची हडकम्प मच गया. सीईओ के कक्ष में बैठकर टीम ने वाटर शेड़ से जुड़े दस्तावेज एवं आंगनवाडी भवन सहित अन्य शिकायतो से जुड़े तमाम दस्तावेजो को तलब किया और दिन भर रिकार्ड खंगाले गए. जिला परियोजना अधिकारी वाटरशेड़ संजय सिंह के खिलाफ शिकायत की गई थी, जांच कमेटी ने संजय सिंह को भी सामने बैठाकर पूरे दस्तावेजो के साथ सवाल-जवाब भी किये. दरअसल संजय सिंह पर आरोप लगाया गया है कि प्रभारी रहते हुए फर्जी तरीके से भुगतान नियमो को दरकिनार कर किया गया है और बगैर अनुमोदन के आंगनवाडी भवन की राशि जारी कर दी गई है. तमाम बिन्दुओ की शिकायत की जांच टीम कर रही है.

निर्माण की फाइल मिली स्टोर में

जांच टीम जब पहुंची तो बड़ी मसक्कत के बाद वाटर शेड़ घोटाले से जुड़ी फाइले स्टोर में मिली. जबकि निर्माण में सभी फाइल नस्ती होनी चाहिये थी. पिछले दस साल से फाइल नही मिल रही थी और जब टीम ने दस्तावेज तलब किये तो आनन-फानन स्टोर से नस्ती फाइल खोजकर टीम के सामने पेश की गई. सभी रिकार्डो का टीम ने बारीकी से अवलोकन किया. दस्तावेजो के परीक्षण के बाद गुरूवार को टीम भौतिक सत्यापन के लिये मौके पर जा सकती है और उसके बाद शिकायतकर्ता को भी तलब किया जायेगा. जांच उपरांत जांच प्रतिवेदन संचालक राजीव गांधी जल ग्रहण मिशन को देना होगा.

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