सार्वजनिक धन का गोलमाल मानते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर से मांगा हलफनामा

 

सार्वजनिक धन का गोलमाल मानते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर से मांगा हलफनामा

 

जबलपुर। मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित की गयी बसों में भरे गये डीजल का भुगतान नहीं किये जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि डीजल भरने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई आदेश जारी नहीं किये गये थे। नगर निगम निगमायुक्त की तरफ से मौखिक आदेश जारी किये गये थे। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने जिला कलेक्टर को दिये आदेश में कहा है कि किस कानून में यह प्रावधान है कि मुख्यमंत्री के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में लगी बसों में निगमायुक्त डीजल भरवाये। एकलपीठ ने इसे प्रथम दृष्टया सार्वजनिक धन के बड़े पैमाने पर गोलमाल का मामला मानते हुए जिला कलेक्टर से हलफनामा में जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता सुगम चंद्र जैन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि आईएसबीटी बस स्टैण्ड के समीप उनका पेट्रोल पंप है। मुख्यमंत्री के सम्मान में 3 जनवरी 2024 को जबलपुर में सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के लिए अधिग्रहित बसों में डीजल भरने के लिए निगमायुक्त ने खाद्य अधिकारी को व्यक्तिगत से भेजा था। अधिग्रहित बसों में लगभग 6 लाख रुपये का डीजल उनके पेट्रोल पंप से भरा गया था। डीजल का भुगतान नहीं होने के कारण उन्होंने निगमायुक्त से संपर्क किया। निगमायुक्त के द्वारा बताया गया कि संयुक्त कलेक्टर तथा जिला आपूर्ति अधिकारी के कार्यालय की तरफ से बसों में डीजल भरवाने कहा गया था। अगस्त 2024 में बिल भुगतान के लिए संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी व निगमायुक्त से संपर्क किया। जिसके बाद कलेक्टर कार्यालय से निगमायुक्त को राशि भुगतान करने के संबंध में लिखित निर्देश दिये गये थे।

एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि अधिग्रहित बस में डीजल भरने के लिए प्रशासन की तरफ से पीओएल जारी किया गया था। याचिकाकर्ता के तरफ से बताया गया कि सिर्फ मौखिक आदेश जारी किये गये थे। एकलपीठ ने जिसे गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में कहा है कि बिना किसी प्रावधान के याचिकाकर्ता से बसों में डीजल भरवाया गया। संयुक्त कलेक्टर व जिला आपूर्ति अधिकारी तथा निगमायुक्त ने पीओएल की प्रतिपूर्ति करवाने का निर्देश दिये। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस संबंध में जिला कलेक्टर हलफनामा में जवाब प्रस्तुत करें। इसके अलावा यह भी बताएं कि किस कानून में निगमायुक्त का दायित्व है कि वह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में लगी बसों में डीजल भरवाये। एकलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता अब याचिका वापस लेने का हकदार नहीं होगा। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आशीष रावत ने पैरवी की।

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