
नयी दिल्ली 27 जनवरी (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि
कृषि उपज के ‘खेत से उपभोक्ता’ तक के मूल्य अंतर को घटाने के प्रयास किये जा रहे हैं और इसकी परिवहन लागत को केंद्र और राज्य सरकार के बीच आधा – आधा बांटने पर विचार हो रहा है।
श्री चौहान ने यहां अपने आवास पर किसानों के साथ अपने साप्ताहिक संवाद में कहा कि सरकार लगातार खेती – किसानी के हित में काम कर रही है। पिछले छह सात महीनों में किसानों और कृषि के हित में फैसले लिये गये हैं।
सरकार का प्रयास खेती को आसान बनाने का है। नीतिगत परिवर्तन से खेती को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा तंत्र बनाने का प्रयास कर रही है जिससे किसानों का भरोसा बढ़े। कोई ऐसा तरीका निकाला जाये कि अगर सब्सिडी दे रहे हैं, तो वह किसान के खाते में मिल जाये। ऐसी व्यवस्था भी बने कि वह पैसा उसी चीज के लिए प्रयोग हो जिसके लिए दिया गया है।
उन्होंने कहा कि तुअर, मसूर और उड़द न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। घरेलू के बाजार में सोयाबीन की कीमत हो गयी है इसकी 20 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। बासमती के निर्यात पर प्रतिबंध हटाया गया है।
केंद्रीय मंत्री कहा कि कृषि उपज सस्ती बिकती है लेकिन दिल्ली में महंगी हो जाती है। उन्होंने कहा, “ खेत से उपभोक्ता के अंतर को हम काम करने के लिए कोशिश कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट में जो भाड़ा लगता है उसमें आधा केंद्र और आधा राज्य सरकार दे दे, इस पर विचार हो रहा है।” उन्होंने कहा कि खाद में किसान को सब्सिडी मिलती है।
