जल जीवन मिशन की कहानी बताएंगे 178 जल योद्धा

नयी दिल्ली, 23 जनवरी (वार्ता) केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत हुई प्रगति में सामुदायिक प्रयासों के अद्भुत प्रदर्शन का उदाहरण बने विभिन्न राज्यों से आये 178 ‘जल योद्धा’ 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर राजधानी में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री चंद्रकांत रघुनाथ पाटिल से मिलेंगे और अपने परिवर्तनकारी अनुभव साझा करेंगे।

मिशन के सूत्रों ने बताया कि इन जल योद्धाओं की कहानियों में ऐसे प्रयास शामिल हैं, जिन्होंने समुदायों को बेहतर जल, स्वच्छता और स्वच्छता प्रणालियों (वॉश) सिस्टम के जरिए स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम बनाया है। जल जीवन मिशन की सफलता की कहानियां उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम में राजस्थान और गुजरात तक, दक्षिण में कर्नाटक से लेकर पूर्वोत्तर में असम तक, भारत के विभिन्न हिस्सों में देखने को मिलती हैं।

सूत्रों ने कहा कि मिशन में योगदान कर रहे ऐसे जल याेद्धाओं के उल्लेखनीय प्रयास न सिर्फ वॉश लक्ष्यों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि एक स्वस्थ और टिकाऊ भारत के निर्माण में भी योगदान दे रहे हैं।

इनमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के जंगल धूसर गाँव के प्रधान राजेंद्र प्रसाद की भी एक कहनी हैं। उन्होंने अपने साथी ग्रामीणों को बड़ी ही मेहनत से हैंडपंप की निर्भरता छोड़कर पाइप वाली जल प्रणाली का सुरक्षित साफ और सुरक्षित पानी अपनाने के लिए मनाया। उन्होंने इस विषय में समुदाय को जागरूक करने का जिम्मा उठाया और नियमित सामुदायिक बैठकों और कार्यान्वयन सहायता एजेंसियों (आईएसए) के सहयोग से उसमें सफल रहे।

इन साझा प्रयासों से वर्ष 2023 तक जंगल धूसर में घरेलू नल कनेक्शनों की संख्या 950 से बढ़ाकर 3,550 कर दी, जो 2.75 गुणा की वृद्धि को दर्शाता है। वहां जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे स्वस्थ तरीकों के अपनाने से निवासियों में जल जनित बीमारियों में कमी आई है।

उत्तर प्रदेश में ही सारौरा गाँव में सेवानिवृत्त मैकेनिकल इंजीनियर पुरनमासी ने गर्मियों में होने वाली पानी की बैक्टीरियल समस्या को हल किया है। उन्होंने जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्यों को जोड़ते हुए सौर ऊर्जा आधारित ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणाली स्थापित की, 250 साल पुराने कुएँ को संरक्षित किया और सार्वजनिक जल बिंदुओं की स्थापना की।

इसी तरह, राजस्थान के गुड़ा भगवानदास गाँव की सरपंच धापू देवी ने आठ लाख रुपए के सामुदायिक योगदान से शत-प्रतिशत घरों तक नल के पानी के कनेक्शन की पहुँच सुनिश्चित की। जिससे वहां के लोगों को पानी के दो से तीन किलोमीटर पैदल चलने की मजबूरी खत्म हो गयी है और वे समय का अधिक सार्थक उपयोग कर रहे हैं।

इसी तरह गुजरात के केलिया वासना गाँव की वीडब्ल्यूएससी अध्यक्ष हीरलबेन हितेंद्रभाई पटेल के नेतृत्व में 4,000 नई पाइपलाइन और दो ऊँचे टैंक बनवाए तथा वॉल्व सिस्टम लगाया गया, जिससे पानी की समान आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी। इन बदलावों से जलभराव कम हुआ, बिजली की लागत घटी और बोरवेल पर निर्भरता खत्म हुई। इसका सकारात्मक असर स्वास्थ्य, खेती और उत्पादकता पर भी पड़ा। हीरलबेन इस काम में जल एवं स्वच्छता प्रबंधन संगठन (डब्ल्यूएएसएमओ), अहमदाबाद का धन्यवाद करती हैं।

जल शक्ति मंत्री से मिलने वाले जल योद्धओं में कर्नाटक के कोप्पल जिले के कोलूर गाँव की श्रीमती शिवम्मा भी हैं। गांव में लीक होती पाइपलाइनों, पानी की भारी बर्बादी और संरक्षण के प्रति जागरूकता की कमी जैसी कई समस्याएँ थीं। उन्होंने ग्राम सभाओं, स्कूल प्रतियोगिताओं और स्व-सहायता समूह (एसएचजी) की चर्चाओं का आयोजन किया, जिससे गाँव में जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी की संस्कृति को बढ़ावा मिला। इससे अब कोलूर गाँव पूरी तरह बदल चुका है, जहाँ 24 घंटे सातों दिन जल की आपूर्ति होती है।

मिशन के सूत्रों ने बताया कि इस प्रकार की एक कहानी असम के उपाहुपारा जिले की हैै। वहां निवासियों को पहले लोहे से दूषित ट्यूबवेल के कारण असुरक्षित पेयजल और बीमारियों का सामना करना पड़ता था। जल जीवन मिशन और एक जल उपभोक्ता समिति के प्रयासों से जागरूकता अभियान और हर घर, नल से जल (पीडब्ल्यूएसएस) योजना के माध्यम से घरों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराया गया है।

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