जन अभियान परिषद द्वारा आयोजित हुई विवेकानंद जी के दर्शन पर संभागीय व्याख्यानमाला
रीवा: इक्कीसवी शताब्दी के बदलते परिवेश में जहां सूचना और प्रद्योगिकी का युग चल रहा है ऐसे में स्वामी जी के चिंतन को अपनाना आवश्यक हैं. स्वामी जी शिक्षा के वर्तमान रूप को अभावात्मक बताते थे. स्वामी विवेकानंद भारतीयों के लिए पाश्चात्य दृष्टिकोण से प्रभावित शिक्षा पद्धति के स्थान पर भारतीय गुरुकुल पद्धति को अपनाने के पक्ष मे थे, जिसमें विद्यार्थियों और शिक्षको मे निकटता के संबंध के साथ श्रद्धा, पवित्रता ज्ञान, धैर्य, विश्वास, विनम्रता, आदर, आदि सदगुणों का समावेश हुआ करता था. वर्तमान शिक्षा में इन सभी सद्गुणों का समावेश अत्यंत आवश्यक है. उक्त उदगार जन अभियान परिषद द्वारा पेंटियम प्वाइंट महाविद्यालय रीवा में आयोजित स्वामी विवेकानंद जी के जीवन दर्शन पर आधारित व्याख्यानमाला कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल नें व्यक्त किये.
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ हरिश्चंद द्विवेदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी का भारत के संतों की परंपरा मे अद्वितीय स्थान हैं और देश के बाहर जो उनको ख्याति मिली है उसका उदाहरण दूसरा नहीं है. कार्यक्रम का विषय प्रबोधन जन अभियान परिषद के संभागीय समन्वयक प्रवीण पाठक ने किया, उन्होने बताया कि जन अभियान परिषद द्वारा प्रदेश के समस्त जिलों में स्वामी विवेकानंद जी विचारों व दर्शन को लेकर व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के प्रतिभावान छात्र. छात्राओं को जिला पंचायत अध्यक्ष व उपस्थित अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में डॉ उमेश पाण्डेंय, डॉ श्रवण त्रिपाठी, प्राचार्य डॉ मिश्रा, एवं शैक्षणिक स्टाफ व जन अभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक अमित अवस्थी, सुषमा शुक्ला, अनीता मिश्रा, अजय चतुर्वेदी, राजेश अवधिया, धीरेन्द्र शुक्ला, एवं जन अभियान परिषद से संबंद्व स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि, परामर्शदाता, एवं छात्र छात्रायें उपस्थित रहे
