
धौहनी विधायक भी नाराज, विजय फिर चर्चाओं में, दोनों चौकी प्रभारियों पर लगा था गंभीर आरोप
नवभारत न्यूज
सिंगरौली 16 जनवरी। पुलिस चौकी निवास एवं बगदरा में दो चौकी प्रभारियों की पदस्थापना को लेकर पुलिस अमले में ही चर्चाओं का बाजार गर्म है। दोनों चौकी प्रभारी पूर्व में यही से गंभीर आरोप में हटा दिये गये थे। इन दोनों चौकी प्रभारियों की यही फिर से पदस्थापना किये जाने से तरह-तरह के सवाल भी खड़े किये जा रहे हैं।
गौरतलब है कि बगदरा चौकी में पूर्व में पदस्थ चौकी प्रभारी अरूण सिंह पर आरोप था कि वे एक आंचलिक मीडियाकर्मी उदित बैस के पास मारपीट किया था। जहां तत्कालीन एसपी ने मामले की जांच कराया था और आरोप सही पाने पर चौकी प्रभारी को तत्कालीन एसपी मो. यूसुफ कुरैशी ने लाईन अटैच कर दिया था। वही डेढ़ महीने पूर्व निवास के महुआ गांव में तत्कालीन एसपी की टीम ने दो कबाड़ दुकानों में दबिश देकर भारी मात्रा में बेशकीमती मशीनरी कलपूर्जे जप्त किये गये थे। तत्कालीन एसपी निवेदिता गुप्ता ने निवास चौकी प्रभारी प्रियंका सिंह बघेल को इसी आरोप में लाईन अटैच कर दिया था। लेकिन हाल ही में दोनों उपनिरीक्षको को उसी चौकी में पदस्थापना किये जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि आदेश मौखिक है। अब चर्चा इस बात की है कि जिस चौकी क्षेत्र में आरोप के चलते हटाये गये थे। फिर वही पदस्थापना किये जाने के पीछे मंशा क्या रही है। साथ ही यह भी चर्चा है कि निवास के पोस्टिंग से क्षेत्रीय विधायक धौहनी नाखुश हैं। साथ ही प्रभारी मंत्री तक यह बात पहुंच चुकी है। यहां विजय की भी चली है। जिले में विजय की दखलअंदाजी से माननीय विधायकगण भी अन्दर-अन्दर नाराज दिख रहे हैं। इधर पुलिस अधीक्षक को सही जानकारी भी अधिनस्थों के द्वारा न दिये जाने से भी पुलिस महकमें की किरकिरी शुरू है।
पुरस्कार न मिलने से कुछ पुलिसकर्मियों में मलाल
बरगवां थाना क्षेत्र के बड़ोखर गांव में हरि प्रसाद प्रजापति के मकान के सेफ्टी टैंक में चार युवको का शव मिला था। जिसमें मकान मालिक के पुत्र का भी शव शामिल था। इस सामूहिक जघन्य हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस की कड़ी मसक्कत एवं धड़पकड़ के बाद आरोपी गिरफ्तार कर लिये गये। किन्तु जब पुलिस महकमे को पुरस्कार देने की बात आई तो अंधी हत्या की गुत्थी को सुलझाने में शामिल कुछ पुलिस कर्मियों को पुलिस महानिदेशक के पुरस्कार सूची से वंचित कर दिया गया। फाईनल सूची से ही नाम हटा दिया गया है। दबी जुबान में इसे भेदभाव माना जा रहा है। वही डीजी भोपाल के यहां सूची तैयार करने वालों पर ही सवाल खड़े किये जा रहे हैं। हालांकि प्रभारी आईजी ने वंचित पुलिस सेवको को पुरस्कार देने का आश्वासन भी दिया है।
इनका कहना:-
पुरस्कार में जिस पुलिस सेवको का नाम छुटा है। उन्हें डीआईजी कार्यालय से दिया जाएगा। ईनाम पाने वालो की सूची लम्बी होती है। रही बात चौकी प्रभारियों की पदस्थापना की उसमें जानकारी लूंगा।
साकेत प्रकाश पाण्डेय
डीआईजी, रीवा
