18111 किसानों से धान का किया गया उपार्जन, खरीदी गई धान की 70.18 प्रतिशत फसल भंडारित
सीधी: जिले में खरीफ उपार्जन 2024-25 के लिए 44 उपार्जन केन्द्रों से 1051650 क्विंटल धान की खरीदी का कार्य हो चुका है। 24778 पंजीकृत किसानों में से 9 जनवरी 2025 तक 18111 किसानों ने अपनी धान के फसल की बिक्री कर दी है।जिन किसानों ने अपनी धान की फसल की बिक्री की है उन्हें 241.88 करोड़ का भुगतान करना है। जिसमें से 128.37 करोड का भुगतान किया जा चुका है। शेष किसानों को भी भुगतान बैंक खाते के माध्यम से करने की प्रक्रिया सतत रूप से चल रही है। किसानों से खरीदी गई फसल में से 683793.11 मीट्रिक टन धान की फसल गोदामों में भंडारित की जा चुकी है। शेष 367857.77 मीट्रिक टन धान के फसल का परिवहन कार्य किया जा रहा है।
वरिष्ट अधिकारियों का निर्देश है कि उपार्जन केन्द्रों में खरीदी गई फसलों को जल्द से जल्द नजदीकी गोदामों में भंडारित किया जाए। जिससे मौसम की प्रतिकूलता के चलते यदि बारिश हुई तो उन्हें भीगने से सुरक्षित किया जा सके। जिले में 70.18 प्रतिशत किसानों से खरीदी गई धान की फसल का भंडारण गोदामों में किया जा चुका है। तत्संबंध में जानकारों का कहना है कि धान खरीदी का कार्य पूरे प्रदेश के साथ ही सीधी जिले में भी 23 जनवरी 2025 तक किया गया। जल्द ही उपार्जन केन्द्रों में मौजूद धान की सभी मात्रा का सुरक्षित भंडारण करा दिया जाएगा। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सीधी जिले के सभी गोदामों में धान का भरपूर स्टाक कर दिया गया है। जगह की कमी के चलते ही परिवहन का कार्य भी प्रभावित हुआ है फिर भी इसके लिए विभागीय अधिकारी यह व्यवस्था बना रहे हैं कि उपार्जन केन्द्रों में मौजूद धान की शेष मात्रा को भी जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों में भंडारण करा दिया जाए।
धान के उपार्जन एवं भंडारण पर बडे अधिकारियों की नजर भी बनी हुई है। उन्हें प्रतिदिन के प्रगति से लगातार अवगत कराया जा रहा है। जिससे उपार्जन केन्द्रों में मौजूद धान की पूरी मात्रा का उठाव जल्द से जल्द सुनिश्चित करा दिया जाएगा। उधर शिकायतें हैं कि उपार्जन केन्द्रों में बोरी में 40.800 किलो धान की बजाय 42.43 किलो धान की भराई कराई जा रही है। जब किसान ज्यादा धान देने से मना करते हैं तो उनको समझाया जाता है कि वर्तमान में धान में नमी बनी हुई है। इस वजह से 2-3 किलो धान बाद में तौलाई के बाद कम हो जाएगी। इसी वजह से ज्यादा धान लिया जा रहा है। जिससे भंडारण के दौरान कम धान की शिकायत सामने न रहे। किसानों का कहना है कि इस तरह की मनमानी अधिकांश उपार्जन केन्द्रों में बनी हुई है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में खरीदी केन्द्रों में सूचना पटल तक लगवाने की जरूरत नहीं समझते।
सुविधा शुल्क देकर की जा रही बिक्री
धान खरीदी के लिए सीधी जिले में 44 उपार्जन केन्द्र बनाए गए थे। जिनके माध्यम से पंजीकृत किसानों के धान की फसल की खरीदी का कार्य किया जा रहा है। देखा यह गया कि अधिकांश किसान धान के फसल की बिना सफाई कराए ही बिक्री कराने के लिए आते थे। उपार्जन केन्द्र में सर्वेयर द्वारा रिजेक्ट करने पर उन्हें फिर से सफाई कराने की मजबूरी निर्मित हो जाती है। किसान फसल को सुखवाकर नहीं ले आते थे। इस वजह से उसमें काफी नमी रहती है। मशीन से जांच के उपरांत नमी के कारण भी फसल को खरीदी से रिजेक्ट कर दिया जाता था। उस दौरान कई किसान सुविधा शुल्क देकर अपनी फसल के सेम्पल को पास कराते हैं। नियुक्त सर्वेयरों द्वारा खुलेआम सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। किसान भी कमी निकलने पर सुविधा शुल्क देकर फसल की बिक्री कर रहे हैं।
113.51 करोड़ किसानों को होना है भुगतान
जिले में 44 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से पंजीकृत 24778 किसानों में से 18111 किसानों द्वारा अपनी धान की बिक्री की गई है। इस तरह अभी पंजीकृत 6667 किसानों ने धान की फसल की बिक्री नहीं की है। पंजीकृत 18111 बिक्री करने वाले किसानों को कुल 241.88 करोड का भुगतान करना था। अभी तक शासन की ओर से 128.37 करोड का भुगतान किसानों के बैंक खाते में आ चुका है। अब भी सैकड़ों किसानों को धान बिक्री की राशि नहीं मिली है। अभी 113.51 करोड रुपए का भुगतान किसानों को किया जाना है। जिसकी प्रक्रिया तेजी के साथ चल रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सभी किसानों के बैंक खाते में जल्द ही राशि भेजने की कार्यवाई शुरू है। विभाग सभी धान बेंचने वाले किसानों को जल्द से जल्द राशि भेजने की कार्यवाई में अपनी ओर से जुटा हुआ है।
इनका कहना है
जिले के उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी का कार्य किया जा रहा है। किसानों की खरीदी गई धान का कुल भुगतान 241.8 करोड़ का होना है, जिसमें अभी 128.37 करोड़ का भुगतान संबंधित किसानों के बैंक खाते में किया जा चुका है। भुगतान की कार्यवाई भी लगातार चल रही है।
एन.एस.बड़ेरा, जिला प्रबंधक, एम.पी.स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन लिमिटेड सीधी
