लोगों पर कर देते हैं हमला
इंदौर:एक एसा समय था जब आवारा पशुओं से शहर की सड़कें पटी रहती थी, जिससे शहर की सुंदरता पर भी सवाल उठते थे वहीं रोज़ दुर्घटनाए भी हुआ करती थी जिससे जनहानि होती थी. लेकिन अभी भी आवारा श्वानों से लोगों को छुटकारा नहीं मिल पाया है.अगर बात करें आवारा श्वानों की तो यहां दिन ब दिन गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं. हर रोज़ आवारा कुत्तों के कांटने के मरीज़ लाल असपताल पहुंच रहे हैं. रेबि•ा जो एक घातक जानलेवा बीमारी है.
यहां किसी जानवर के काटने से हो जाती है. इनमें अधिकांश आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं ज़्यादा है. जो चिंताजनक है. शहर के कुल 85 वार्डों के प्रतेक क्षेत्र में आवारा श्वानों की टोली आसानी से देखने को मिल रही है. इनकी तादाद बढ़ती जा रही है. जबकि नगर निगम के एक दावे के अनुसार आवारा कुत्तों की नस बंदी की जा रही है. सवाल यह उठता है कि तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या में तेज़ी से इज़ाफा क्यों होते आ रहा है. वर्तमान स्थिति में आवारा कुत्तों शहर के हर हिस्से में है. चाहे वह बस्ती हो, नगर हो या पॉश कॉलोनी आवारा कुत्तों को आतंक हर जगह है.
इनका कहना है.
नगर निगम द्वारा आवारा श्वान पकड़ने का वाहन नियममित तौर से हर क्षेत्र में पहुंचना चाहिए और इमानदारी से कार्य को अंजाम देना चाहिए ताकि इस घातक समस्या से लोगों को निजात मिल सके.
– मुन्नालाल आर्य
अधिकांश यहां आवारा श्वान छोटे बच्चों पर हमला करते है. अगर किसी ने देख लिया तो बचाव हो जाता है वरना इसके गंभीर परिणाम हो जाते हैं. अब इस पर एक्शन होना चाहिए.
– परवेज खान
रात को हमला हमला होता है जिस तरह आवारा पशु मुक्त शहर किया, अब आवारा श्वानों को भी शहर से दूर रखना होगा. इन पर होने वाली कार्रवाई अभी तक ठंडी पड़ी हुआ है.
– धर्मेंद्र कुमार
