कचरा निपटान संबंधी मामले की सुनवायी, उच्च न्यायालय ने छह सप्ताह का दिया समय

जबलपुर, 07 जनवरी (वार्ता) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल स्थित बंद पड़ी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के कचरे के निपटान के मामले में आज सुनवायी करते हुए इस मुद्दे को लेकर सुरक्षा मानकों के साथ कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस के कैत और न्यायाधीश विवेक जैन की पीठ ने इस मामले की सुनवायी की। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए शपथपत्र में न्यायालय के पूर्व के आदेश के परिपालन में उठाए गए कदमों के बारे में बताया गया। इसमें कहा गया है कि पिछले सप्ताह यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से अपशिष्ट 12 कंटेनरों में भरकर धार जिले के पीथमपुर में निर्धारित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।
सरकार की ओर से बताया गया कि अदालत के दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जा रही है। इस दौरान पीथमपुर और आसपास के लोगों के विरोध के संबंध में भी अदालत को अवगत कराया गया। अदालत को बताया गया कि भ्रामक खबरों के कारण विरोध हुए। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि इस संबंध में कोई भी मीडिया भ्रामक या “फेक न्यूज” नहीं चलाएगा।
दरअसल उच्च न्यायालय ने तीन दिसंबर को राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि फैक्ट्री के रासायनिक कचरे को सुरक्षित तरीके से भोपाल से ले जाकर पीथमपुर में नष्ट किया जाए। इस आदेश के परिपालन के संबंध में आज इस प्रकरण में सुनवाई हुयी। सरकार ने अदालत को बताया कि कुछ लोगों द्वारा भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है, जिससे लोग अनावश्यक रूप से आंदोलित हो रहे हैं और कचरे के निष्पादन की आगे की प्रक्रिया नहीं की गई है। सरकार ने अपने हलफनामे में अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की।
अदालत ने कहा कि सरकार को तीन दिसंबर के आदेश के पालन में जो आवश्यक कार्रवाई करनी है, वो अपने स्तर पर निर्णय लेकर नियमों और दिशानिर्देशों के अनुरूप करे। इसी के साथ अदालत ने छह सप्ताह का समय दिया और कहा कि सरकार कानून के अनुसार प्रक्रिया का पालन करते हुए अदालत के आदेश का पालन करे।
भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात्रि में जहरीली मिथाइल आइसो सायनेट (मिक) गैस के रिसाव के कारण पांच हजार से अधिक लोगों की मौत हो गयी थी और लाखों लोग प्रभावित हुए थे। विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी का कारण बनी कीटनाशक बनाने वाली यह फैक्ट्री चार दशकों से अधिक समय से बंद पड़ी है, लेकिन वहां पर 337 मीट्रिक टन रासायनिक कचरा पड़ा हुआ था। इसके निष्पादन को लेकर दायर याचिका पर सुनवायी के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि इस कचरे को इंदौर के पास धार जिले के पीथमपुर में उस संयंत्र में ले जाकर नष्ट किया जाए, जहां पर अन्य औद्योगिक इकाइयों का खतरनाक कचरा निष्पादित किया जाता है।
राज्य सरकार ने चार दिन पहले भोपाल फैक्ट्री परिसर में पड़ा लगभग 337 मीट्रिक टन कचरा दिशानिर्देशों का पालन करते हुए 12 कंटेनर से पीथमपुर भेज दिया है। कचरा अभी तक सुरक्षित तरीके से रखा हुआ है। इस बीच वहां पर दो दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को स्वयं वहां पर शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आगे आना पड़ा। उन्होंने आज फिर लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों और भ्रामक खबरों पर ध्यान नहीं दें। सरकार वहां की जनता के हितों को भी ध्यान में रखकर अदालत के आदेश के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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