नयी दिल्ली, (वार्ता) विद्युत बैटरी से चलने वाले वाहनों की मांग प्रोत्साहित करने के लिये हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और विनिर्माण (फेम-इंडिया) की योजना के दूसरे चरण में इस साल अक्टूबर तक 8,844 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं और कुल 16.15 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण एवं बिक्री को प्रोत्साहित किया गया है।
यह जानकारी भारी उद्योग मंत्रालय की एक रिपोर्ट में दी गयी है। इन वाहनों में 14.27 लाख ई-दुपहिया, 1.59 लाख ई-तिपहिया, 22,548 ई-कारऔर 5,131 ई-बसें शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार फेम-दो में 10,985 ईवी बैटरी चार्जिंग केंद्र (पीसीएस) स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 8,812 ईवी पीसीएस स्थापना के लिये आवंटित किये जा चुके हैं।
इस योजना में चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम शामिल हैं और इसने महत्वपूर्ण नीतिगत पहलों का समर्थन किया है, जैसे कि ईवी पर जीएसटी कम करना और राज्यों की ईवी नीतियों को सक्षम बनाना शामिल है।
फेम योजना के पहले चरण की शुरूआत पहली अप्रैल, 2015 को की गयी और यह दो साल की अवधि के लिये मंजूरी दी गयी थी। इसकी सफलता के बाद दूसरे चरण (यानी फेम-दो) को 2019 में शुरू किया गया और इसके लिये 11,500 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रावधान किया गया। दूसरे चरण में 31 अक्टूबर, 2024 तक कुल 8,844 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं। इसमें सब्सिडी के लिये 6,577 करोड़ रुपये, पूंजीगत परिसंपत्तियों के लिये 2,244 करोड़ रुपये और अन्य खर्चों के लिये 23 करोड़ रुपये शामिल हैं।
