प्राकृतिक कृषि मात्र खेती नहीं है सच्चे अर्थों में भक्ति: देवव्रत

गांधीनगर, (वार्ता) गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोमवार को कहा कि प्राकृतिक कृषि मात्र खेती नहीं है बल्कि सच्चे अर्थों में भक्ति है।

राज्य में प्राकृतिक खेती की परिस्थिति की समीक्षा करने और इसका दायरा बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आज श्री देवव्रत की अध्यक्षता में राजभवन में आयोजित हुई। इसमें उन्होंने कहा कि पर्यावरण, जन आरोग्य और भूमि की गुणवत्ता सुधारने का महायज्ञ है। इस कार्य की जवाबदारी सम्भालते हुए सभी को पूर्ण प्रमाणिकता और निष्ठापूर्वक इस कार्य में लगना होगा।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी ने राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन की रचना करके प्राकृतिक कृषि को अब भारत का मिशन बना दिया है। भारत के प्रत्येक राज्य को प्राकृतिक खेती मिशन के साथ जोड़ा गया है। इस मिशन का नेतृत्व गुजरात को करना है। उन्होंने कहा कि सभी को स्वास्थ्यप्रद अनाज मिले, यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। प्राकृतिक कृषि मात्र खेती नहीं है बल्कि सच्चे अर्थों में भक्ति है। कृषि मंत्री राघवजीभाई पटेल के साथ ही कृषि-किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग की अग्र सचिव अंजु शर्मा, राज्यपाल के अग्र सचिव अशोक शर्मा और गुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष कुमार बंसल इस बैठक में उपस्थित रहे।

श्री देवव्रत ने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती अपनाएं, जो किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं वह अपना कृषि क्षेत्र बढ़ाएं, प्राकृतिक खेत उत्पादों की बिक्री व्यवस्था ज्यादा सुदृढ़ हो, प्राकृतिक खेती के लिए अनिवार्य देसी गाय की संख्या में बढ़ोतरी हो- नस्ल में सुधार हो, प्राकृतिक खेती करने के उत्सुक किसानों को गोबर-गौमूत्र, जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत और अन्य प्राकृतिक औषधियां आसानी से उपलब्ध हों, गुजरात की कृषि युनिवर्सिटियां प्राकृतिक कृषि क्षेत्र में नियमित संशोधन करे और उसके निष्कर्ष किसानों के समक्ष प्रस्तुत करें, इसके लिए उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया और प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

कृषि मंत्री राघवजी भाई पटेल ने प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने के लिए परिणामलक्ष्यी प्रयासों पर बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय मिशन की तरह लिया है। राज्यपाल श्री देवव्रत प्राकृतिक खेती के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और हम सभी को उनके साथ मिलकर सामूहिक रूप से मिशन मोड पर कार्य करना है। प्राकृतिक खेती वास्तविक अर्थों में किसानों, सरकार और भावी पीढ़ी के लिए लाभदायक है। इसका उल्लेख करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि गुजरात में प्राकृतिक कृषि का दायरा बढ़ाने के लिए कोई सुझाव हो तो, उसका आने वाले बजट में समावेश किया जा सकता है। प्राकृतिक खेती द्वारा ज्यादा से ज्यादा किसान लाभान्वित हों और रासायनिक खाद का उपयोग कम हो, इस बारे में उन्होंने योजनाबद्ध कार्य करने का अनुरोध किया।

इस समीक्षा बैठक में कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग के संयुक्त सचिव पीडी. पलसाणा, आत्मा के निदेशक एसजे. सोलंकी, पशुपालन निदेशक फाल्गुनी ठाकर, बागायत निदेशक सीएम. पटेल, गुजरात प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति सीके. टिम्बड़िया, जूनागढ़ कृषि युनिवर्सिटी के कुलपति वीपी. चोवटिया, सरदार कृषिनगर दांतीवाडा कृषि युनिवर्सिटी के कुलपति आरएम. चौहाण, आणंद एवं नवसारी कृषि युनिवर्सिटी के प्रतिनिधिगण, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, कृषि-आत्मा विभाग के अधिकारी, गुजरात कॉ-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने प्राकृतिक कृषि के लिए उनके द्वारा किए गए कामकाज की प्रगति से राज्यपाल को अवगत करवाया। उन्होंने आगामी समय में प्राकृतिक कृषि का दायरा किस तरह से बढ़ाया जाए, इस पर उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया।

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