गुजरात के नर्मदा जिले में एक पुल के गिरने की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत अपने बुनियादी ढांचे को लेकर वास्तव में गंभीर है ? इस हादसे में कई वाहन नदी में समा गए और दर्जनों लोगों की जान चली […]
संपादकीय
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पूर्णिया जिले के टेटमा गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों को ‘डायन’ बताकर जिंदा जलाया जाना आधुनिक भारत के माथे पर एक शर्मनाक धब्बा है. यह घटना किसी एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि हमारे समाज की उस सामूहिक असफलता की गवाही है, जिसमें विज्ञान की उपलब्धियों की […]
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति, खासकर टैरिफ को लेकर उनका आक्रामक रुख, वैश्विक व्यापार पर एक बार फिर दबाव बना रहा है. 14 देशों पर थोपे गए नए टैरिफ और ब्रिक्स देशों के लिए अतिरिक्त शुल्क की चेतावनी के बीच भारत के लिए यह समय एक निर्णायक मोड़ […]
ब्राजील के रियो डी जनेरियो में संपन्न हुआ 17वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, अपने पारंपरिक आर्थिक सहयोग के एजेंडे से हटकर, कुछ अधिक मूलभूत और सामयिक मुद्दों पर केंद्रित रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति और उनके दो टूक बयानों ने सम्मेलन को एक नई दिशा दी, खासकर आतंकवाद के खिलाफ […]
बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस मनाया गया. जाहिर है इस दिन प्लास्टिक मुक्त जीवन का संकल्प लिया गया. यह संकल्प केवल एक दिन का कर्मकांड ना बनें इसका ध्यान रखने की जरूरत है. दरअसल, हमें ठहरकर उस ‘ प्लास्टिक से सुविधा’ पर विचार करना चाहिए, जो अब एक […]
पवित्र अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ हमेशा से ही आस्था और भक्ति का प्रतीक रहा है, लेकिन इस वर्ष इसका महत्व कहीं अधिक गहरा गया है. 3 जुलाई, 2025 को शुरू हुई यह 38 दिवसीय यात्रा, जो 9 अगस्त को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर संपन्न होगी, मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान […]
छह वर्ष के अंतराल के बाद, मध्य प्रदेश भाजपा संगठन में हुआ बदलाव न केवल एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, बल्कि यह पार्टी के भीतर आत्मनिरीक्षण और भविष्य की रणनीति का भी संकेत है. विष्णु दत्त शर्मा के सफल कार्यकाल के बाद, हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर सौंपना, नेतृत्व […]
तमिलनाडु के बाद महाराष्ट्र में जिस तरह से हिंदी भाषा के खिलाफ विरोध की सियासत तेज़ हुई है, वह न केवल चिंताजनक है, बल्कि देश की भाषिक एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए भी एक गंभीर खतरे की घंटी है. त्रिभाषा फॉर्मूले के बहाने, जिस तरह मराठी अस्मिता के नाम […]
जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा, जिसे “चलती हुई आस्था” का महोत्सव कहा जाता है, इस बार श्रद्धा के साथ-साथ अफरा-तफरी और अव्यवस्था की आशंकाओं को भी अपने साथ ले आई.हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से पुरी पहुंचते हैं, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के भव्य रथों के दर्शन हेतु. परंतु […]