न्यायपालिका पर भरोसा तभी मजबूत होता है, जब उसके फैसलों में केवल कानून का शुष्क अनुपालन नहीं, बल्कि न्याय का जीवंत भाव भी प्रतिबिंबित हो. सुप्रीम कोर्ट के हाल के दो निर्णय इसी संवेदनशील न्याय बोध का परिचायक हैं .एक, अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा से जुड़े अपने ही पूर्व […]
संपादकीय
संपादकीय
भारतीय राजनीति में संगठन की भूमिका केवल चुनावी ढांचे तक सीमित नहीं होती, बल्कि वही किसी भी दल की वैचारिक जीवटता, नेतृत्व की निरंतरता और कार्यकर्ताओं की राजनीतिक ऊर्जा को दिशा देता है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाल ही में एक पुरानी तस्वीर साझा […]
नीति आयोग द्वारा जारी उच्च शिक्षा पर ताज़ा रोड मैप केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक शैक्षणिक पहचान को पुनर्गठित करने वाला दूरदर्शी प्रस्ताव है. लंबे समय से भारत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आउट बाउंड नेशन की तरह देखा जाता रहा है,जहां लाखों छात्र बेहतर अवसरों […]
मध्य प्रदेश में ‘ई-जीरो एफआईआर’ व्यवस्था की शुरुआत केवल एक तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था की उस सोच में बदलाव का संकेत है जिसमें पीडि़त को केंद्र में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं. ग्वालियर में आयोजित ‘अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट’ के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह […]
मध्य प्रदेश की विकास-यात्रा इन दिनों एक निर्णायक मोड़ से गुजर रही है. ग्वालियर की धरती से शुरू हुई ‘अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट’ केवल एक आर्थिक आयोजन भर नहीं, बल्कि सुशासन और परिणाम केंद्रित प्रशासनिक सोच का प्रतीक बनकर उभरी है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर […]
अरावली पर्वत श्रृंखला केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि उत्तर भारत की पारिस्थितिकी का आधार स्तंभ है. यह श्रृंखला थार के रेगिस्तान को हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर बढऩे से रोकती है, भूजल भंडारण को पोषित करती है और प्रदूषण नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. […]
भारत की विदेश और व्यापार नीति ने बीते एक दशक में जिस आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाई है, भारत-न्यूजीलैंड के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) उसी यात्रा की एक मजबूत कड़ी है. महज नौ महीने में तय हुआ यह समझौता केवल व्यापारिक करार नहीं, बल्कि […]
पड़ोसी बांग्लादेश में बीते कुछ समय से जिस तरह की हिंसा, अराजकता और लक्षित दंगों की घटनाएं सामने आ रही हैं, वह केवल ढाका की आंतरिक समस्या भर नहीं रह गई है. हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले, मंदिरों की तोडफ़ोड़, घरों-दुकानों में आगजनी और सोशल मीडिया के जरिए नफरत का […]
पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति केवल औपचारिक राजनयिक संवाद तक सीमित नहीं रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्राएं इस बदलते दृष्टिकोण की स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं. दिसंबर 2025 में जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की यात्राओं से लेकर उससे पहले नाइजीरिया, गुयाना और भूटान […]