
खातेगांव। थाना प्रभारी दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जो पुलिस की आगे की पड़ताल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्तव्य निर्वहन के दौरान वाहन से कुचलकर टीआई दिलीप पुरी की हत्या के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच के दायरे में रहा आरोपी मोहिन जायसवाल की अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मोहिन की मौत के साथ ही इस पूरे मामले की जांच में गुजरात से जुड़े शराब तस्करी नेटवर्क की कई महत्वपूर्ण कड़ियों तक पहुंचने की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
गुजरात कनेक्शन की अहम कड़ी था मोहिन, अब कौन खोलेगा राज?-
पुलिस जांच में सामने आए अवैध शराब सिंडिकेट में मोहिन जायसवाल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण बताई जा रही थी। बताया जाता है कि वह अहमदाबाद में रहकर शराब कारोबार के लिए फाइनेंस की व्यवस्था करने और गुजरात क्षेत्र में शराब की खेप खपाने की जिम्मेदारी संभालता था। ऐसे में SIT के लिए मोहिन से पूछताछ करना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता था।
जांच के दौरान उससे यह जानकारी मिल सकती थी कि गुजरात में शराब की खेप किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी, इस कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल थे, माल की सप्लाई और भुगतान का नेटवर्क किस तरह संचालित होता था तथा इस अवैध कारोबार में किन अन्य लोगों की भूमिका थी। अब उसकी मौत के बाद इन सवालों के जवाब तलाशना पुलिस के लिए एक नई चुनौती हो सकता है। हालांकि, जांच एजेंसियों के पास अन्य आरोपियों, दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इन कड़ियों को जोड़ने का विकल्प मौजूद है।
चार लोगों की पार्टनरशिप से संचालित हो रहा था सिंडिकेट-
दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच के दौरान हरदा जिले के टिमरनी क्षेत्र से लाई जा रही अवैध शराब की खेप और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की पड़ताल की गई थी। जांच में एक बड़े शराब सिंडिकेट की जानकारी सामने आई। मुख्य आरोपी राहुल जायसवाल के कथित कबूलनामे के अनुसार, इस अवैध शराब कारोबार और शराब ठेके में चार लोगों की साझेदारी थी।
बताई गई हिस्सेदारी के अनुसार राहुल जायसवाल की 30 प्रतिशत, मनीष जायसवाल की 30 प्रतिशत, मोहिन जायसवाल की 30 प्रतिशत और पाटेन्द्र जायसवाल की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। पाटेन्द्र जायसवाल के नाम पर शराब का ठेका होने की बात भी सामने आई थी।
इसमें मोहिन जायसवाल को अहमदाबाद में बैठकर फाइनेंस और गुजरात में शराब की खेप खपाने की जिम्मेदारी संभालने वाला प्रमुख साझेदार बताया गया था। इस लिहाज से वह केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं, बल्कि शराब तस्करी के दूसरे राज्यों से जुड़े नेटवर्क की जानकारी देने वाली महत्वपूर्ण कड़ी भी हो सकता था।
नर्मदा ढाबे के सामने वाहन से कुचलकर हुई थी टीआई की हत्या-
गौरतलब है कि हरदा जिले के टिमरनी क्षेत्र से अवैध शराब से भरी आयशर गाड़ी लाई जा रही थी। खातेगांव क्षेत्र में नर्मदा ढाबे के सामने पुलिस टीम ने वाहन को रोकने का प्रयास किया था। इसी दौरान वाहन चालक ने तत्कालीन थाना प्रभारी दिलीप पुरी को कुचल दिया था। गंभीर रूप से घायल टीआई को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया था।
इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की और विशेष जांच दल का गठन कर शराब तस्करी के नेटवर्क की पड़ताल की। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस कारोबार से जुड़े लोगों और उनकी कथित हिस्सेदारी की जानकारियां सामने आईं।
मोहीन की मौत के बाद अब दूसरे आरोपियों से खुलासों की उम्मीद-
पुलिस विभाग के अनुसार, मोहिन जायसवाल पिछले कुछ समय से गुजरात में पुलिस टीमों की निगरानी में था। दो-तीन दिन पहले उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे अहमदाबाद के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच में ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हुई थी। गहन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
अब पुलिस अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम और अन्य वैधानिक दस्तावेजों को केस डायरी में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी करेगी। वहीं, इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों से पूछताछ और फरार लोगों की तलाश जारी रहेगी।
मोहिन की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि गुजरात में फैले शराब तस्करी नेटवर्क से जुड़े जिन लोगों और कारोबार के तौर-तरीकों की जानकारी उससे मिल सकती थी, उनका खुलासा अब कैसे होगा? क्या दूसरे आरोपी इस नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने ला पाएंगे? फिलहाल दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच में यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
