डेली कॉलेज में संघ के आयोजन को लेकर पूर्व मंत्री ने ली आपत्ति

इंदौर:डेली कॉलेज बोर्ड ऑफ गवर्नेस के सदस्य पूर्व मंत्री ने दो दिन पहले संघ के आयोजन को लेकर आपत्ति जताई है. साथ ही उन्होंने बोर्ड एवं प्राचार्य से उक्त मामले स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की है. पत्र में कॉलेज की निष्पक्षता और पहचान को लेकर चिंता जताई है.डेली कॉलेज में 2 से 4 नवंबर आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल की बैठक को लेकर पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह ने आपत्ति जताई है. पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह डेली कॉलेज बोर्ड ऑफ गवर्नेस के सदस्य है. उन्होंने बोर्ड ऑफ गवर्नेस को पत्र लिखा है, जिसमें कॉलेज में आरएसएस की बैठक, विवेकानंद की प्रतिमा और राजनीतिक कार्यक्रम होने को लेकर सवाल खड़े किए है.

पूर्व मंत्री ने पत्र में लिखा है कि 150 साल पुराने डेली कॉलेज में इन दिनों लगातार राजनीतिक कार्यक्रम हो रहे है. इसके लिए कॉलेज के शिक्षण कार्य में बदलाव कर दिया गया. छात्रों से हॉस्टल खाली करवाया गया. उक्त कार्य डेली कॉलेज के विधान के विपरीत है. प्रियव्रत सिंह ने पत्र में लिखा है कि अहिल्या प्रतिमा ओर सर हेनरी डेली की प्रतिमा के बाद अब विवेकानंद की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव किया जा रहा है, यह आपत्तिजनक है.

पूर्व में भी आरएसएस के कार्यक्रम को लेकर पूर्व मंत्री सिंह ने अध्यक्ष विक्रम सिंह पंवार के साथ बैठक में मुद्दा उठाया था, जिसमें पंवार ने इसी गतिविधियां नहीं होने का भरोसा दिया था, लेकिन फिर राजनीतिक कार्यक्रम होने पर सिंह ने उक्त मुद्दे उठाते हुए ई-मेल पर पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि डेली कॉलेज की 150 साल पुरानी प्रतिष्ठा, निष्पक्षता और पहचान पर सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह सरकार में कांग्रेस का अधिवेशन पंचमढ़ी में किया गया था, सिंह मुख्यमंत्री थे और डेली कॉलेज में कार्यक्रम करा सकते थे, लेकिन उन्होंने कॉलेज की प्रतिष्ठा का ध्यान रखा था. आज इसके उलट स्थिति बनती जा रही है. इस मुद्दे पर बोर्ड और कॉलेज प्राचार्य से स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की गई है.

कांग्रेस महापुरुष की विरोधीः महापौर
पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह के डेली कॉलेज बोर्ड को पत्र लिखने के मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा विवेकानंद युवाओं के आदर्श है. सिंह द्वारा उनकी प्रतिमा का विरोध करना, कांग्रेस की देश के महापुरुषों के प्रति असम्मानीय मानसिकता को दर्शाता है.

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