दार एस सलाम, 06 नवंबर (वार्ता) तंजानिया के प्रमुख विपक्षी नेता एवं चाडेमा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष टुंडू लिसु को अशांति और हिंसा भड़काने के आरोप में चार वर्ष कैद की सजा सुनायी गयी है।
राजधानी स्थित उच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने उन्हें देशद्रोह के अधिक गंभीर आरोप से बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष इस आरोप को साबित करने में विफल रहा।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि 58 वर्षीय श्री लिसु के चुनावी अभियान का नारा ‘सुधार नहीं, तो चुनाव नहीं’ जनता को 2025 के आम चुनावों को बाधित करने के लिए उकसाने के लिए पर्याप्त था। पिछले वर्ष अप्रैल से हिरासत में चल रहे लिसु ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि अदालत ने राजनीतिक निर्देशों पर हिंसा भड़काने का नया आरोप गढ़ा है।
उन्होंने इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय (कोर्ट ऑफ अपील) में जाने और जमानत के लिए आवेदन करने की बात कही है।
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 के राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ ‘चामा चा मपिंदुजी’ पार्टी की राष्ट्रपति सामिया सुलुहू हसन ने 98 प्रतिशत वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। विपक्ष ने प्रमुख उम्मीदवारों (जिसमें लिसु भी शामिल थे) को चुनाव से बाहर रखे जाने के कारण इसे लोकतंत्र का मजाक करार दिया गया था। चुनावों के बाद हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में आधिकारिक जांच के अनुसार कम से कम 500 लोगों की मौत हो गयी थी, हालांकि विपक्षी दल इस आंकड़े को कहीं अधिक बताते हैं।
वर्ष 2017 में जानलेवा हमले में बाल-बाल बचे अधिवक्ता एवं नेता लिसु लंबे समय से सरकार के कड़े आलोचक रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने तंजानिया में विपक्षी नेताओं के उत्पीड़न और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
