आने वाले वर्षों के लिए सोने में बचत करने वालों के लिए NSE की इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR)
हर दिवाली पर भारत के कई परिवार एक शांत संकल्प लेते हैं। दीप जलाने और मिठाइयाँ बाँटने से पहले ही अनेक परिवार सोना खरीदने के लिए कुछ पैसे अलग रख देते हैं। सदियों से यह परंपरा केवल एक रस्म नहीं रही है। इसका उद्देश्य कल के लिए, ऐसे भविष्य के लिए कुछ बचाकर रखना रहा है, जब जरूरतें बदलेंगी और नियमित आमदनी का स्रोत बंद हो जाएगा। लेकिन सोना खरीदना इस फैसले का केवल पहला हिस्सा है। दूसरा हिस्सा है उस सोने को कई वर्षों तक सुरक्षित रखना। भौतिक सोने के मामले में उसे अपने पास सुरक्षित रखना जरूरी होता है। इस दिवाली इसके लिए एक नया विकल्प है : NSE EGR (Electronic Gold Receipts)।
EGR आखिर है क्या?
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) एक प्रकार की प्रतिभूति है, जिसका स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार किया जा सकता है। यह निवेशक को SEBI से मान्यता प्राप्त तिजोरी में रखे भौतिक सोने का स्वामित्व देती है। सोना SEBI के नियमन वाली तिजोरी में रखा जाता है। उसके स्वामित्व का इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण एक रिसीट के रूप में निवेशक के डीमैट खाते में जमा किया जाता है। इसकी अवधारणा सरल है। भौतिक सोना तिजोरी में रखा जाता है और उसके स्वामित्व का प्रतीक इलेक्ट्रॉनिक रिसीट के रूप में जारी किया जाता है। सोने की खरीद-बिक्री से जुड़ी निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार इस रिसीट का कारोबार किया जा सकता है या इसे भौतिक सोने में बदला जा सकता है। EGR धारक की संपत्ति सोना ही रहता है।
शुद्धता और मात्रा स्पष्ट रूप से तय
हर EGR एक्सचेंज द्वारा निर्धारित सोने की एक निश्चित मात्रा और शुद्धता को दर्शाता है। शुद्धता की दो श्रेणियाँ हैं : 999 यानी 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोना और 995 यानी 99.5 प्रतिशत शुद्ध सोना। ये दोनों श्रेणियाँ 10 मिलीग्राम, 100 मिलीग्राम, 1 ग्राम, 10 ग्राम, 100 ग्राम और 1 किलोग्राम की मात्रा में उपलब्ध हैं। ध्यान रखें कि हर EGR में सोने की मात्रा या शुद्धता एक जैसी नहीं होती। इसलिए खरीदने से पहले संबंधित विवरण अवश्य जाँच लेना चाहिए।
लंबी अवधि के लिए बचत करने वालों के लिहाज से छोटी मात्रा वाले विकल्प अहम हैं। कोई व्यक्ति केवल 100 मिलीग्राम सोने से शुरुआत कर सकता है। बचत बढ़ने के साथ वह धीरे-धीरे 1 किलोग्राम तक की बड़ी मात्रा में निवेश कर सकता है।
पर्दे के पीछे किसकी क्या भूमिका है?
EGR केवल डिजिटल गोल्ड का उत्पाद नहीं है, बल्कि इसके पीछे बाजार के बुनियादी ढाँचे से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं की समन्वित व्यवस्था काम करती है। कारोबार एक्सचेंज पर होता है। NSE कारोबार के लिए मंच उपलब्ध कराता है और बाजार के नियमों तथा कीमतों की व्यवस्था तय करता है। वॉल्ट मैनेजर यह सुनिश्चित करता है कि भौतिक सोना प्राप्त किया जाए, सुरक्षित रखा जाए और उसकी जाँच हो। वह EGR बनाने और भौतिक सोना निकालने की प्रक्रिया भी शुरू करता है। डिपॉजिटरी इलेक्ट्रॉनिक स्वामित्व का पूरा रिकॉर्ड रखती है। एक्सचेंज पर हुए सौदों की क्लियरिंग और सेटलमेंट की जिम्मेदारी क्लियरिंग कॉरपोरेशन की होती है। निवेशक मान्यता प्राप्त ट्रेडिंग सदस्य की मदद से EGR खरीदते और बेचते हैं। बाजार में कीमत का निर्धारण कई कारकों के आधार पर होता है। इनमें सोने का स्पॉट भाव, मांग और आपूर्ति, सोने की शुद्धता और उसका स्वरूप शामिल हैं। सेटलमेंट प्रक्रिया T+1 व्यवस्था के अनुसार होती है। निवेशकों को कारोबार संबंधी दिशा-निर्देशों के मुताबिक धनराशि और प्रतिभूतियों से जुड़ी आवश्यकताएँ पूरी करनी होती हैं।
भौतिक सोना वापस लेने का विकल्प
EGR उन साधनों से अलग है, जिनमें निवेशक को केवल सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर वित्तीय लाभ मिलता है। EGR में धारक तिजोरी से वास्तविक सोना निकाल सकता है। इसके रूपांतरण की प्रक्रिया सीधी है। धारक आवेदन के माध्यम से रूपांतरण का अनुरोध करता है, जिसे वॉल्ट प्रबंधन की मंजूरी मिलती है।
देश के लिए व्यापक महत्व
EGR का एक और फायदा देश के स्तर पर इसका व्यापक प्रभाव है। EGR व्यवस्था में घरेलू रिफाइनरियों में शुद्ध किए गए सोने के साथ-साथ रिसाइकिल किए गए सोने को भी शामिल किया जाएगा। इससे भारत में प्राप्त होने वाले अधिक सोने को औपचारिक बाजार में लाने में मदद मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप आयातित सोने पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
इन बातों का रखें ध्यान
सोने में किसी भी अन्य निवेश की तरह EGR में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है। सोने की कीमतें बदल सकती हैं। न तो नियामकीय निगरानी और न ही भौतिक सोना मिलने की व्यवस्था मुनाफे की गारंटी देती है या पैसे गंवाने का जोखिम खत्म करती है। EGR को निश्चित रिटर्न देने वाला निवेश उत्पाद नहीं समझना चाहिए। EGR लेने की प्रक्रिया के बारे में अधिकृत ट्रेडिंग सदस्य से जानकारी ली जा सकती है। दिवाली केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि भविष्य की योजना बनाने का भी अवसर है। यदि आप इस साल सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो केवल निवेश की रकम ही नहीं, बल्कि सोने का प्रकार, उसकी शुद्धता, उसे रखने का तरीका और जरूरत पड़ने पर उसकी उपलब्धता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दें। EGR के रूप में सोना रखने का इलेक्ट्रॉनिक विकल्प भी मौजूद है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे गए सोने को भौतिक सोने का समर्थन प्राप्त होता है।
